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| गरियाबंद; योजना का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे’—गरियाबंद शिविर में विधायक-कलेक्टर का फील्ड एक्शन Aajtak24 News |
गरियाबंद - जिले के फिंगेश्वर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेम्हरतरा में सुशासन तिहार 2026 के तहत “संवाद से संपूर्ण समाधान” कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 14 ग्रामों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए और अपनी समस्याएं लेकर प्रशासन के समक्ष पहुंचे। शिविर में विधायक रोहित साहू और कलेक्टर बीएस उइके सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रही। दोनों ने स्वयं भी स्वास्थ्य जांच कराते हुए जनता के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित किया।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित शिविर में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य जांच कराई, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने गर्भवती माताओं की गोदभराई की रस्म पूरी की। आयुष्मान भारत योजना के तहत 4 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए, जबकि मत्स्य विभाग द्वारा 2 स्व-सहायता समूहों को जाल वितरण किया गया। इससे ग्रामीणों को सीधे लाभ मिला और योजनाओं की पहुंच स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
विधायक रोहित साहू ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे शिविर शासन की योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने सरपंचों से अपील की कि गर्मी को देखते हुए शिविरों में आने वाले आवेदकों को ठंडा पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन हितग्राहियों का राशन कार्ड ई-केवाईसी लंबित है, उसे तीन दिनों के भीतर पूरा किया जाए ताकि किसी को राशन से वंचित न रहना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान विधायक ने 14 ग्राम पंचायतों के लिए 2-2 लाख रुपये और सेम्हरतरा में पौनी पसारी भवन निर्माण हेतु 7 लाख रुपये की घोषणा भी की। कलेक्टर बीएस उइके ने कहा कि सभी आवेदन पात्रता के अनुसार समयसीमा में निराकृत किए जाएंगे और प्रशासन का प्रयास है कि हर पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ मिले। शिविर में जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, एसडीएम विशाल महाराणा सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- शिविरों में मौके पर समाधान का दावा किया जाता है, लेकिन कितने मामलों का स्थायी निपटारा होता है और कितने बाद में फिर लंबित रह जाते हैं?
- विभिन्न योजनाओं के लाभ वितरण में क्या यह सुनिश्चित किया जाता है कि वास्तव में सबसे जरूरतमंद हितग्राही ही चयनित हो, या प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी की गुंजाइश रहती है?
- हर शिविर में घोषणाएं और वितरण होते हैं, लेकिन क्या इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की कोई स्वतंत्र मॉनिटरिंग रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है?
