| जगदलपुर; बारूद से बदलाव तक: ‘नया बस्तर’ गढ़ने के लिए राज्यपाल का नवाचार मंत्र Aajtak24 News |
जगदलपुर - छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर को अब “शांति और विश्वास का गढ़” बताते हुए इसके समग्र विकास के लिए नवाचार आधारित योजनाओं पर जोर दिया। कलेक्टोरेट जगदलपुर में आयोजित बैठक में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बदलते बस्तर की सकारात्मक छवि को आगे बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध और अभिनव प्रयास बेहद जरूरी हैं। राज्यपाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, पर्यावरण और आजीविका के क्षेत्र में प्राथमिकता तय करते हुए स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विकास मॉडल तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत अधिक से अधिक पौधरोपण और उनकी देखभाल में जनभागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही जैविक खेती, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने महिला स्व-सहायता समूहों को मशरूम, अदरक और हल्दी उत्पादन से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों व वनोपज का मूल्य संवर्धन कर बाजार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कोसा वस्त्र के डिजाइन में नवाचार कर इसे और आकर्षक बनाने पर भी जोर दिया गया।
इस दौरान राज्यपाल ने टीबी उन्मूलन के लिए निक्षय मित्र योजना के तहत फूड बास्केट वितरण, मोतियाबिंद मरीजों को चश्मा वितरण और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। साथ ही कलेक्टोरेट परिसर में आम का पौधरोपण किया। बैठक में कलेक्टर आकाश छिकारा ने जिले में चल रही योजनाओं और नवाचारों की जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों ने भी विभिन्न विकास और सामाजिक मुद्दों पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर बस्तर अब “शांति और विश्वास का गढ़” बन चुका है, तो क्या जमीनी स्तर पर सुरक्षा और नक्सल प्रभाव पूरी तरह समाप्त होने के दावे को डेटा के साथ साबित किया जा सकता है?
- नवाचार आधारित विकास की बात हो रही है—लेकिन क्या इन योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट, संसाधन और प्रशिक्षित मानवबल उपलब्ध है?
- स्थानीय उत्पादों और वनोपज को बाजार से जोड़ने की बात वर्षों से हो रही है—अब तक इसका ठोस और स्थायी मॉडल क्यों विकसित नहीं हो पाया?