सुकमा; सरकार खुद चली गाँव: कागज नहीं, मौके पर बन रहे हक के दस्तावेज Aajtak24 News

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सुकमा - सुशासन तिहार 2026 के तहत सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ गांवों में प्रशासनिक अमला सीधे पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कर रहा है। डब्बाकोंटा और ढोंढरा में आयोजित ग्रामस्तरीय शिविरों में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर ही दिया गया। महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी और एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और कई मामलों का त्वरित निराकरण किया गया।

कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत ग्रामीणों को जन्म प्रमाण पत्र, किसान किताब, राशन कार्ड, जाति और निवास प्रमाण पत्र, श्रम कार्ड और आयुष्मान कार्ड मौके पर बनाकर वितरित किए जा रहे हैं। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे और योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच रहा है।जिले में इस अभियान के तहत कुल 317 ग्रामस्तरीय और 14 क्लस्टर स्तरीय शिविर आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य हर गांव तक योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है।

शिविरों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, जॉब कार्ड, पेंशन, मनरेगा भुगतान, बिजली, हैंडपंप सुधार और आवास जैसी मूलभूत समस्याओं का भी तेजी से समाधान किया जा रहा है। साथ ही योजनाओं के हितग्राहियों की सूची पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जा रही है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर अब शिविरों में मौके पर ही दस्तावेज बन रहे हैं, तो पहले ग्रामीणों को वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर क्यों काटने पड़े?
  2. क्या इन शिविरों के बाद भी स्थायी रूप से ऐसी व्यवस्था बनेगी या फिर लोग दोबारा पुरानी प्रक्रिया में फंस जाएंगे?
  3. शत-प्रतिशत सैचुरेशन का लक्ष्य है—लेकिन क्या वास्तव में हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्वतंत्र जांच होगी?

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