ग्वालियर; धरती का पानी खत्म होने की कगार पर? ग्वालियर में नए बोरिंग पर कलेक्टर की सख्त रोक Aajtak24 News


ग्वालियर; धरती का पानी खत्म होने की कगार पर? ग्वालियर में नए बोरिंग पर कलेक्टर की सख्त रोक Aajtak24 News

ग्वालियर - ग्वालियर में बढ़ते जल संकट और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रुचिका चौहान ने जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए नए नलकूप और ट्यूबवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 10 जुलाई 2026 अथवा पर्याप्त वर्षा होने तक लागू रहेगा।

प्रशासन के अनुसार गर्मी के मौसम में पेयजल स्रोतों की जल आवक क्षमता लगातार घट रही है और कई क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका गहरा गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और क्षेत्रीय अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।

आदेश के तहत शासकीय पेयजल स्रोतों जैसे हैंडपंप और नलकूपों के 150 मीटर दायरे में निजी उपयोग के लिए किसी भी प्रकार का हैंडपंप या ट्यूबवेल खनन प्रतिबंधित रहेगा। मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के अंतर्गत जिले की पूरी सीमा में बिना अनुमति नए नलकूप खनन पर रोक लगाई गई है।

इसके साथ ही नदी, तालाब, नाले और अन्य जल स्रोतों के पानी का उपयोग सिंचाई, औद्योगिक और व्यवसायिक कार्यों में भी बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा। निजी वाहन धुलाई केंद्रों पर भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि पेयजल स्रोतों को बचाने और आम नागरिकों को गर्मी में पानी उपलब्ध कराने के लिए यह कदम जरूरी है।

हालांकि लोकहित में शासकीय विभागों द्वारा किए जाने वाले पेयजल संबंधी नलकूप खनन को छूट दी गई है। वहीं विशेष परिस्थितियों में कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लिखित अनुशंसा के बाद संबंधित एसडीएम निजी पेयजल नलकूप की अनुमति दे सकेंगे।

कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत दो वर्ष तक की जेल, दो हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर जिले में भूजल संकट इतना गंभीर है, तो पिछले वर्षों में अवैध बोरिंग और भूजल दोहन रोकने के लिए प्रशासन ने कितनी कार्रवाई की और उसका परिणाम क्या रहा?
  2. क्या यह प्रतिबंध केवल आम लोगों और किसानों तक सीमित रहेगा, या बड़े होटल, कॉलोनाइजर और उद्योगों के अवैध जल दोहन पर भी समान सख्ती दिखाई जाएगी?
  3. जब कई क्षेत्रों में सरकारी जलापूर्ति पहले से असफल है, तो नए नलकूप प्रतिबंध के बाद वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था के लिए प्रशासन का ठोस प्लान क्या है?

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