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| विदिशा; घर-घर पहुंची जनगणना की दस्तक! विदिशा मॉडल की दिल्ली तक चर्चा Aajtak24 News |
विदिशा - जिले में जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं। शुक्रवार को जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कलेक्ट्रेट के बेतवा सभा कक्ष में जिले में चल रहे जनगणना कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिले की प्रगति, डिजिटल डेटा फीडिंग, स्वगणना और फील्ड स्तर पर चल रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी अंशुल गुप्ता, अपर कलेक्टर एवं जिला जनगणना अधिकारी अनिल कुमार डामोर सहित जनगणना निदेशालय और जिला प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन के जरिए जिले के तहसील नक्शे, जनसंख्या, चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स और प्रगणकों की जानकारी साझा की।
निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने का कार्य नहीं, बल्कि देश की भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जनगणना के जरिए प्राप्त डेटा सरकार की योजनाओं, बजट और विकास कार्यों को दिशा देता है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने फील्ड में चल रहे मकान सूचीकरण कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और प्रगणकों से कहा कि 30 मई तक चलने वाले इस अभियान को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा फीडिंग में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसे तुरंत उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए।
बैठक के दौरान निदेशक गोयल ने विदिशा जिले की “स्वगणना” उपलब्धि की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले ने सेल्फ एन्यूमरेशन अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है और यह अन्य जिलों के लिए उदाहरण बन सकता है। इस दौरान गोड़खेड़ी ग्राम के शिक्षक केजी राजपूत, सुपरवाइजर राघवेंद्र सिंह और प्रगणक सुरेंद्र दुबे को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। शिक्षक केजी राजपूत ने बताया कि उन्होंने गांव में घर-घर जाकर लोगों को स्वगणना के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप गांव में 100 प्रतिशत स्वगणना का लक्ष्य हासिल किया गया। प्रशासन ने इसे जनसहभागिता का सफल मॉडल बताया है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- जनगणना में पारदर्शिता और सही डेटा फीडिंग की बात हो रही है, लेकिन क्या प्रशासन यह सुनिश्चित कर पाएगा कि फील्ड स्तर पर दबाव या जल्दबाजी में गलत आंकड़े दर्ज न किए जाएं?
- डिजिटल जनगणना और स्वगणना को सफलता बताया जा रहा है, लेकिन जिन ग्रामीण या गरीब परिवारों के पास स्मार्टफोन या तकनीकी जानकारी नहीं है, उनके लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?
- क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई स्वतंत्र ऑडिट सिस्टम है जो यह जांच सके कि प्रगणकों द्वारा जुटाए गए आंकड़े वास्तव में सही हैं, या पूरा सिस्टम केवल सरकारी रिपोर्टों पर ही निर्भर रहेगा?
