सुकमा; टंकी देखी, हकीकत टटोली: सुकमा के फ़ायदागुड़ा में पानी पर ‘दिल्ली की नजर’, क्या सच में बदलेगी तस्वीर? Aajtak24 News

सुकमा; टंकी देखी, हकीकत टटोली: सुकमा के फ़ायदागुड़ा में पानी पर ‘दिल्ली की नजर’, क्या सच में बदलेगी तस्वीर? Aajtak24 News

सुकमा - जिले के दूरस्थ ग्राम फ़ायदागुड़ा में उस समय हलचल तेज हो गई जब भारत सरकार के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के मिशन संचालक श्री कमल किशोर सोन ने खुद गांव पहुंचकर सोलर पंप आधारित पेयजल योजना का जायजा लिया। उनके साथ कलेक्टर अमित कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान मिशन संचालक ने पानी टंकी, स्टैंड पोस्ट और योजना की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा। उन्होंने गांव की सरपंच श्रीमती परसेक दुले से योजना के संचालन, गांव की आबादी और पहले के जल स्रोतों को लेकर विस्तार से चर्चा की। ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि योजना का लाभ वास्तव में जमीन पर कितना पहुंच रहा है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी गांव स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रहना चाहिए और यह सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की शिकायतों को नजरअंदाज न किया जाए और उनका तुरंत समाधान किया जाए।

मिशन संचालक ने जल संरक्षण और स्रोत की स्थिरता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सिर्फ योजना बनाना ही काफी नहीं, बल्कि लंबे समय तक पानी की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सक्रिय रहने और समस्याओं को दर्ज करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा गांव के एक व्यक्ति को प्रशिक्षित कर योजना के संचालन में शामिल करने, पानी टंकी की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। निरीक्षण के दौरान स्वच्छ भारत मिशन की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जहां ग्रामीणों द्वारा शौचालय उपयोग की जानकारी दी गई।

इस मौके पर कई वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने योजना के क्रियान्वयन पर अपनी निगरानी रखी।

 आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. अगर हर गांव तक स्वच्छ पानी पहुंचाना प्राथमिकता है, तो अब तक कितने गांव ऐसे हैं जहां योजना सिर्फ कागजों में ही चल रही है, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
  2. सोलर पंप आधारित योजनाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन और ट्रेनिंग क्यों नहीं दिखती, और क्या इसके लिए कोई स्थायी मॉडल तैयार किया गया है?
  3. जल जीवन मिशन के तहत खर्च हुए बजट और जमीन पर दिख रहे परिणामों में कितना अंतर है, और क्या इस पर कोई स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा?

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