
बलौदाबाजार ; अब ‘जितनी जमीन, उतना खाद’: किसानों पर डिजिटल निगरानी या खेती में बड़ा सुधार? Aajtak24 News
बलौदाबाजार - इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसा के आधार पर अब किसानों को उनकी जमीन और फसल की जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन जल्द ही ई-उर्वरक वितरण प्रणाली लागू करने जा रहा है, जिसके तहत किसानों को डिजिटल व्यवस्था के जरिए उर्वरक वितरण किया जाएगा।
बलौदाबाजार जिले में इस नई व्यवस्था को लेकर सहकारी समितियों के लिए ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने समिति प्रबंधकों को नई प्रणाली की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को उनके रकबे के अनुसार अनुशंसित उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और इसके लिए 9 प्रकार के उर्वरकों का समूह तैयार किया गया है। किसान अपनी जमीन की जरूरत और उपलब्धता के आधार पर इनमें से उर्वरक खरीद सकेंगे।
बैठक में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने दावा किया कि इससे पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों की खपत कम होगी और खेती अधिक संतुलित तरीके से की जा सकेगी। इफको कंपनी के प्रतिनिधियों ने समिति प्रबंधकों को नैनो उर्वरकों के उपयोग की तकनीकी जानकारी भी दी।
प्रशासन के अनुसार जिले की सहकारी समितियों में फिलहाल 22,810 मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया जा चुका है। किसानों को यह खाद केवल पॉस मशीन के माध्यम से वितरित किया जाएगा। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भंडारण में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए।
नई व्यवस्था को लेकर किसानों के बीच उत्सुकता के साथ-साथ सवाल भी उठने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई समितियों में नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में किसानों को आशंका है कि यदि पॉस मशीन या ऑनलाइन सिस्टम में गड़बड़ी हुई, तो खाद वितरण प्रभावित हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ लागू हुई, तो खाद की कालाबाजारी और फर्जी वितरण पर रोक लग सकती है। वहीं दूसरी ओर छोटे और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले किसानों के लिए यह व्यवस्था शुरुआती दौर में चुनौती भी बन सकती है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि ई-उर्वरक वितरण पूरी तरह पॉस मशीन और ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित होगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क फेल होने या मशीन खराब होने की स्थिति में किसानों को खाद कैसे मिलेगा?
- क्या सरकार यह गारंटी दे सकती है कि नई डिजिटल व्यवस्था के नाम पर किसानों को खाद वितरण में देरी या तकनीकी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा?
- जिले में 22,810 मीट्रिक टन खाद भंडारण का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह सुनिश्चित करने की ठोस व्यवस्था है कि जरूरत के समय किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद वास्तव में उपलब्ध हो सके?