बालोद; शिविर में बंटी सौगातें, लेकिन 183 आवेदन अब भी लंबित: क्या ‘सुशासन’ आधा अधूरा? Aajtak24 News

शिविर में बंटी सौगातें, लेकिन 183 आवेदन अब भी लंबित: क्या ‘सुशासन’ आधा अधूरा? Aajtak24 News

बालोद - सुशासन तिहार 2026 के तहत बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर आम नागरिकों और हितग्राहियों के लिए राहत और सौगातों का केंद्र बना रहा। शिविर में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 256 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 73 मामलों का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन अब भी लंबित हैं। गुरूर विकासखंड स्थित नगर पंचायत कार्यालय परिसर में आयोजित इस शिविर में महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, मत्स्य और नगर पंचायत विभाग सहित कई विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों को लाभ वितरित किए।

शिविर में 5 बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया, वहीं 3 गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म पूरी कर उन्हें सुपोषण किट प्रदान की गई। समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांग हितग्राहियों को ध्वनि श्रवण यंत्र और छड़ियां वितरित कीं। स्वास्थ्य विभाग ने निक्षय पोषण आहार और आयुष्मान कार्ड बांटे, जबकि नगर पंचायत द्वारा राशन कार्ड वितरित किए गए। मेडिकल बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचे दिव्यांगजनों के प्रमाण पत्र भी बनाए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। जनप्रतिनिधियों ने मंच से सुशासन तिहार के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए लोगों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। हालांकि, शिविर में मिली सौगातों और त्वरित निराकरण के दावों के बीच यह तथ्य भी सामने आया कि कुल 256 आवेदनों में से केवल 73 मामलों का ही समाधान हो पाया। यानी 183 आवेदन अब भी प्रक्रिया में हैं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ऐसे शिविर स्थायी समाधान दे पा रहे हैं या फिर केवल प्रतीकात्मक राहत तक सीमित हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राशन कार्ड, पेंशन, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। शिविरों में आवेदन तो ले लिए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में बाद में फाइलें अटक जाती हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस बार लंबित मामलों पर गंभीरता से काम करेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब 256 में से सिर्फ 73 आवेदनों का ही निराकरण हो पाया, तो क्या बाकी 183 मामलों के लिए कोई तय समय-सीमा और जवाबदेह व्यवस्था बनाई गई है?
  2. शिविरों में योजनाओं का लाभ बांटने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अगर लोगों को राशन कार्ड, पेंशन और मूलभूत सुविधाओं के लिए बार-बार आवेदन देना पड़ रहा है, तो क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं है?
  3. क्या सुशासन तिहार सिर्फ आयोजन और फोटो तक सीमित रह जाएगा, या लंबित मामलों की मॉनिटरिंग और कार्रवाई की सार्वजनिक रिपोर्ट भी जारी की जाएगी?

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