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| जबलपुर; आकांक्षी ब्लॉक की समीक्षा में बड़ा सवाल — योजनाएं कागजों में दौड़ रहीं या गांवों तक पहुंच रहीं? Aajtak24 News |
जबलपुर - संभाग के संभागायुक्त धनंजय सिंह ने गुरुवार को मंडला जिले के आकांक्षी विकासखंड नारायणगंज में नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन और अधोसंरचना से जुड़े संकेतकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को विकास योजनाओं में तेजी लाने और तय लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए गए।
संभागायुक्त ने कहा कि नीति आयोग का उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल और डेटा आधारित मॉनिटरिंग के जरिए तेज और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल बैठकों और आंकड़ों तक सीमित न रहकर जमीनी परिणामों पर ध्यान दिया जाए। साथ ही चयनित संकेतकों को पूरी तरह “सैचुरेट” करने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने को कहा।
बैठक में संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी मौजूद रहे। संभागायुक्त ने सभी विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
समीक्षा बैठक के बाद संभागायुक्त ने बीजाडांडी विकासखंड के खूंटापड़ाव गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। उन्होंने वहां खरीदी व्यवस्था, किसानों को उपलब्ध सुविधाओं और समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की स्थिति का जायजा लिया। किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को व्यवस्थाएं बेहतर करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को मिट्टी परीक्षण, उन्नत कृषि तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। संभागायुक्त ने यह भी कहा कि किसानों को समय पर भुगतान मिले और उपार्जित गेहूं के परिवहन व भंडारण में तेजी लाई जाए। संभावित बारिश को देखते हुए गेहूं की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक इंतजाम करने को कहा गया।
हालांकि आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत विकास की बड़ी तस्वीर पेश की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूलों की स्थिति, पेयजल और रोजगार से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासनिक समीक्षा के बाद अब लोगों की नजर वास्तविक परिणामों पर टिकी हुई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम वर्षों से चल रहा है, तो नारायणगंज जैसे क्षेत्रों में अब तक कौन-कौन से ठोस बदलाव जमीनी स्तर पर दिखाई दिए हैं?
- अगर योजनाओं को ‘सैचुरेट’ करने की जरूरत अभी भी पड़ रही है, तो क्या यह नहीं दर्शाता कि पहले की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन पर्याप्त प्रभावी नहीं था?
- किसानों को समय पर भुगतान और परिवहन की बात हर साल होती है, फिर भी उपार्जन केंद्रों पर देरी और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार क्यों सामने आती हैं?
