कटनी; फाइलों में अटके राजस्व मामले अब बने प्रशासन की चिंता… एसडीएम ने अफसरों को दी रोज मैदान में उतरने की चेतावनी Aajtak24 News

कटनी; फाइलों में अटके राजस्व मामले अब बने प्रशासन की चिंता… एसडीएम ने अफसरों को दी रोज मैदान में उतरने की चेतावनी Aajtak24 News

कटनी - कटनी में गुरुवार को संयुक्त तहसील भवन में आयोजित राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी ने लंबित राजस्व प्रकरणों के समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। बैठक में तहसील कटनी नगर और ग्रामीण क्षेत्र के राजस्व कार्यों, धारणाधिकार प्रकरणों, पीएम किसान योजना और उपार्जन केंद्रों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान एसडीएम ने कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देशों का हवाला देते हुए सभी राजस्व अधिकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने विशेष रूप से किसानों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए सहानुभूतिपूर्वक सुनवाई और समय-सीमा में समाधान के निर्देश दिए।

पटवारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों को गंभीरता से लें और धारणाधिकार प्रकरणों की जांच प्रक्रिया में तेजी लाएं। बैठक में जनगणना कार्य और फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा की गई और अधिकारियों को कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए गए।

एसडीएम ने पीएम किसान योजना को लेकर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने सभी पटवारियों से कहा कि वे अपने हल्के में पात्र किसानों की पहचान कर उनके आवेदन पीएम किसान पोर्टल पर दर्ज कराएं। जिन किसानों को तकनीकी दिक्कतों के कारण आवेदन में परेशानी हो रही है, उनकी अलग सूची बनाकर समाधान करने को कहा गया।

बैठक में गैर न्यायिक तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को प्रतिदिन उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करने और वहां की व्यवस्थाओं की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का कहना है कि किसानों को समर्थन मूल्य खरीदी के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

बैठक में तहसीलदार अजीत तिवारी, प्रभारी तहसीलदार अतुलेश सिंह बघेल, आकाश नीरज, अवंतिका तिवारी सहित कई राजस्व अधिकारी और पटवारी मौजूद रहे।

हालांकि समीक्षा बैठकों में लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर नामांतरण, सीमांकन, धारणाधिकार और किसान योजनाओं से जुड़े मामलों में देरी की शिकायतें लंबे समय से बनी हुई हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या इस बार प्रशासनिक सख्ती का असर वास्तव में दिखाई देगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर लंबित राजस्व प्रकरण लगातार बढ़ रहे हैं, तो क्या प्रशासन यह मानता है कि निचले स्तर पर कार्यप्रणाली कमजोर है?
  2. किसानों के मामलों को सहानुभूतिपूर्वक सुनने की बात कही जा रही है, लेकिन महीनों तक नामांतरण और सीमांकन लंबित रहने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
  3. उपार्जन केंद्रों के प्रतिदिन निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, तो क्या इन निरीक्षण रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे?

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