अब बिना अनुमति नहीं खुदेगा बोरवेल! शहडोल में पानी बचाने को कलेक्टर का सख्त फरमान” Aajtak24 News

अब बिना अनुमति नहीं खुदेगा बोरवेल! शहडोल में पानी बचाने को कलेक्टर का सख्त फरमान” Aajtak24 News

शहडोल - जिले में लगातार घटते जलस्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. केदार सिंह ने पेयजल परीरक्षण अधिनियम 1986 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब जिले में बिना अनुमति के नया नलकूप खनन नहीं किया जा सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि अल्पवर्षा के कारण इस वर्ष कई क्षेत्रों में जल संकट गहराने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी नदी, नाले, स्टॉपडैम, सार्वजनिक कुएं और अन्य जल स्रोतों को पेयजल एवं घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित घोषित किया गया है। आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति इन जल स्रोतों का उपयोग व्यावसायिक या अन्य गैर-घरेलू कार्यों के लिए नहीं कर सकेगा।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जिले के जल अभावग्रस्त क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति या निजी ठेकेदार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की पूर्व अनुमति के बिना नया बोरवेल या नलकूप नहीं खोद सकेगा। हालांकि यह प्रतिबंध शासकीय नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर नलकूप खनन कराना चाहता है, तो उसे निर्धारित शुल्क और आवेदन के साथ संबंधित एसडीएम कार्यालय से अनुमति लेनी होगी। अनुमति देने से पहले प्रशासन जल उपलब्धता, क्षेत्र की स्थिति और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर जांच करेगा।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी क्षेत्र में सार्वजनिक पेयजल स्रोत पूरी तरह सूख जाते हैं और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती, तो प्रशासन निजी पेयजल स्रोतों का अधिग्रहण भी कर सकेगा। इसके लिए संशोधित पेयजल परीरक्षण अधिनियम 2002 के प्रावधान लागू किए जाएंगे। कलेक्टर ने साफ चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर मप्र पेयजल परीरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश के पालन के लिए एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस, नगरीय निकाय, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार भूजल दोहन और अनियंत्रित बोरवेल खनन के कारण कई क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में प्रशासन का यह कदम भविष्य के जल संकट को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि अनुमति प्रक्रिया जटिल हुई तो किसानों और आम लोगों को समय पर पानी की व्यवस्था करने में परेशानी हो सकती है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब वर्षों से जिले में भूजल का लगातार दोहन हो रहा था, तब प्रशासन ने पहले सख्त नियंत्रण और निगरानी क्यों नहीं की?
  2. निजी नलकूप खनन के लिए अनुमति अनिवार्य की गई है, तो क्या प्रशासन समयबद्ध और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा या लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?
  3. यदि जल संकट इतना गंभीर है कि निजी जल स्रोतों का अधिग्रहण तक किया जा सकता है, तो जिले में दीर्घकालिक जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए अब तक कौन-से ठोस काम हुए हैं?

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