खनिज माफिया पर GPS का शिकंजा! मुरैना में दस्तावेज अधूरे मिले तो 7 वाहन चालकों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई Aajtak24 News

खनिज माफिया पर GPS का शिकंजा! मुरैना में दस्तावेज अधूरे मिले तो 7 वाहन चालकों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई Aajtak24 News

मुरैना - जिले में अवैध खनिज परिवहन और नियमों की अनदेखी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में खनिज परिवहन में लगे वाहनों में GPS डिवाइस अनिवार्य किए जाने को लेकर प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। इसी क्रम में रविवार को पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सात वाहनों पर चालानी कार्रवाई की और 64 हजार 500 रुपए का राजस्व वसूला। एबी रोड स्थित ग्राम छौंदा में चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान के दौरान ट्रैक्टर, डम्पर और अन्य खनिज परिवहन वाहनों के दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में सात वाहनों के दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर ही चालान काटे।

कार्रवाई के दौरान पांच ट्रैक्टर मोटरयान नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित पाए गए। प्रशासन ने इन्हें जब्त कर थाना सिविल लाइन में सुरक्षित खड़ा कराया। अधिकारियों का कहना है कि बिना नियमों का पालन किए खनिज परिवहन करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

प्रशासन का फोकस अब केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन स्वामियों को GPS आधारित निगरानी प्रणाली से जोड़ने पर भी है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशन में गठित टीमें गांव-गांव जाकर वाहन मालिकों को GPS डिवाइस लगाने के लिए जागरूक कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे खनिज परिवहन की वास्तविक मॉनिटरिंग हो सकेगी और अवैध उत्खनन तथा ओवरलोडिंग पर नियंत्रण लगेगा।

अधिकारियों ने मौके पर मौजूद वाहन स्वामियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जेसीबी, डम्पर और ट्रैक्टरों में अनिवार्य रूप से GPS डिवाइस लगाए जाएं। साथ ही सभी दस्तावेज अपडेट रखें, अन्यथा आगे और कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संयुक्त अभियान में प्रभारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी स्वाती पाठक, परिवहन उपनिरीक्षक अशोक शर्मा, प्रधान आरक्षक अभिषेक शर्मा और पुलिस विभाग की टीम मौजूद रही। हालांकि जिले में लंबे समय से अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई कितनी स्थायी और प्रभावी साबित होती है, इस पर अब लोगों की नजर बनी हुई है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि GPS डिवाइस अब अनिवार्य किए जा रहे हैं, तो अब तक बिना GPS के चल रहे खनिज परिवहन वाहनों की निगरानी कैसे की जा रही थी और अवैध परिवहन को रोकने में प्रशासन क्यों विफल रहा?
  2. सिर्फ दस्तावेजों की जांच और चालान काटने से क्या अवैध खनिज कारोबार पर रोक लग पाएगी, जबकि जिले में लंबे समय से बड़े स्तर पर खनिज माफिया सक्रिय होने के आरोप लगते रहे हैं?
  3. प्रशासन GPS आधारित निगरानी की बात कर रहा है, तो क्या इसके लिए कोई केंद्रीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है या यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा?

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