राजगढ़; जनता सामने, अफसर लाइन में… राजगढ़ में कलेक्टर का ‘दरबार’ बना भ्रष्टाचार पर सीधा वार Aajtak24 News

राजगढ़; जनता सामने, अफसर लाइन में… राजगढ़ में कलेक्टर का ‘दरबार’ बना भ्रष्टाचार पर सीधा वार Aajtak24 News

राजगढ़ - जिले में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की पहल “संवाद से समाधान” अब सिर्फ जनसुनवाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मंच बनता जा रहा है। हर मंगलवार आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में आम नागरिक सीधे कलेक्टर के सामने अपनी समस्याएं रख रहे हैं और कई मामलों में मौके पर ही कार्रवाई होने से लोगों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता विभाग से जुड़ी शिकायतों ने जिले की समितियों में चल रही व्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं की पोल खोल दी। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने शिकायतकर्ताओं से वन-टू-वन चर्चा कर संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में मामलों की सुनवाई की और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

सबसे पहले ग्राम भातखेड़ा के किसान शिवराज सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि सस्ता समिति द्वारा उन्हें डीएपी खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने से खेती प्रभावित हो रही है। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद कलेक्टर ने संस्था प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा ई-टोकन जारी नहीं करने के मामले में भी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पूरे प्रकरण को फाइल पर लेकर निगरानी में रखने को कहा गया। कार्यक्रम में दूसरी बड़ी शिकायत लक्ष्मी उमरी समिति से जुड़ी सामने आई। शिकायतकर्ता संतोष सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि समिति में लगभग 7 लाख रुपये की अनियमित निकासी की गई और कर्मचारियों के वेतन में बिना जानकारी वृद्धि कर दी गई। मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने संबंधित डीआर को कारण बताओ नोटिस जारी करने, पूरे प्रकरण को समय-सीमा बैठक में शामिल करने और 15 दिनों के भीतर सभी समितियों में वेतन निर्धारण प्रक्रिया की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

वहीं तीसरे मामले में शिकायतकर्ता गजराज सिंह ने आरोप लगाया कि उनके नाम पर 40 हजार रुपये का फर्जी खाद वितरण दर्ज कर उनसे राशि जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। इस शिकायत पर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व संस्था प्रभारी हरि सिंह से राशि वसूली करने तथा विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए। “संवाद से समाधान” कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि शिकायतों को सिर्फ दर्ज नहीं किया जा रहा, बल्कि अधिकारियों की मौजूदगी में जवाबदेही तय की जा रही है। इससे जहां आम लोगों का प्रशासन पर भरोसा मजबूत हो रहा है, वहीं विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव भी बढ़ रहा है। राजगढ़ में यह पहल अब सुशासन के मॉडल के रूप में चर्चा में है, क्योंकि यहां शिकायतकर्ता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई का भरोसा मिलता दिखाई दे रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि “संवाद से समाधान” में हर सप्ताह सहकारी समितियों की अनियमितताएं सामने आ रही हैं, तो क्या यह माना जाए कि विभागीय निगरानी पहले पूरी तरह फेल रही है?
  2. किसानों के नाम पर फर्जी खाद वितरण और लाखों की निकासी जैसे मामले लंबे समय तक कैसे चलते रहे? क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी या कार्रवाई सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित रहेगी?
  3. कलेक्टर के सामने शिकायत आते ही कार्रवाई हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि आम दिनों में विभागीय अधिकारी शिकायतों का समाधान क्यों नहीं कर पा रहे? क्या जिले में प्रशासनिक तंत्र सिर्फ जनसुनवाई के दिन ही सक्रिय रहता है?

Post a Comment

Previous Post Next Post