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| सतना; आज ही ब्लॉक में पहुंचें प्रगणक’—जनगणना कार्य को लेकर कलेक्टर का अल्टीमेटम Aajtak24 News |
सतना - कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा प्रकरणों की समीक्षा बैठक में जनगणना कार्य की प्रगति पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रगणक अपने आवंटित ब्लॉक में सोमवार शाम तक पहुंचकर एचएलबी (House Listing Block) का कार्य शुरू करें। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने कहा कि तैयार नजरी नक्शे के अनुसार प्रत्येक मकान की मैपिंग और मोबाइल एप में एंट्री अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी प्रगणक के क्षेत्र में एचएलबी कार्य “नॉट स्टार्टेड” पाया जाता है तो संबंधित चार्ज अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
बैठक में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की भी समीक्षा की गई, जिसमें ऊर्जा विभाग में 1800 और राजस्व विभाग में 1341 लंबित शिकायतों पर कलेक्टर ने असंतोष जताया। उन्होंने सभी विभागों को शिकायतों के संतुष्टिपूर्ण और समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने संबल योजना के तहत सभी पात्र श्रमिकों का पंजीयन सुनिश्चित करने और आवश्यक दस्तावेज बनवाने में हितग्राहियों की मदद करने को कहा। वहीं पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) की स्थिति पर चर्चा करते हुए उचेहरा, कोठी और नागौद क्षेत्रों में बेड ऑक्यूपेंसी बढ़ाने के निर्देश दिए।
गेहूं उपार्जन व्यवस्था की समीक्षा में कलेक्टर ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों की संख्या के अनुरूप सुविधाएं बढ़ाई जाएं और मैदानी कर्मचारी नियमित रूप से केंद्रों का निरीक्षण कर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट दें। जल गंगा संवर्धन अभियान, वृक्षारोपण और गौशाला संचालन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सभी गौशालाओं को कस्टम हायरिंग केंद्रों से जोड़ा जाए ताकि पशुओं के लिए चारा और भूसा की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान फीड और भूसा स्टॉक की नियमित जांच के भी निर्देश दिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि जिला अस्पतालों में फायर सेफ्टी मॉकड्रिल चल रही है। वहीं एमपीआरडीसी के किसी अधिकारी के बैठक में अनुपस्थित रहने और वर्चुअल रूप से न जुड़ने पर कलेक्टर ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में “नॉट स्टार्टेड” की स्थिति क्यों बन रही है—क्या फील्ड मॉनिटरिंग पहले से कमजोर थी?
- सीएम हेल्पलाइन में हजारों शिकायतें लंबित होने के बावजूद क्या विभागों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई स्थायी सिस्टम बनाया गया है?
- गौशालाओं और उपार्जन केंद्रों की लगातार समीक्षा के बावजूद मूलभूत व्यवस्थाओं में सुधार कितनी तेजी से जमीन पर दिख रहा है?
