रीवा; गंगेव जनपद में 'प्रशासनिक तानाशाही' के खिलाफ विद्रोह: सदस्यों ने खोला मोर्चा Aajtak24 News

रीवा; गंगेव जनपद में 'प्रशासनिक तानाशाही' के खिलाफ विद्रोह: सदस्यों ने खोला मोर्चा Aajtak24 News

रीवा/मनगवां - मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार, मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का धैर्य जवाब दे गया है। बुधवार को जनपद पंचायत की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया, जब बड़ी संख्या में सदस्यों ने एकजुट होकर तहसील कार्यालय मनगवां का घेराव किया। सदस्यों ने न केवल जमकर नारेबाजी की, बल्कि सांकेतिक धरने पर बैठकर अपनी उपेक्षा और जनपद में व्याप्त अंधेरगर्दी का कच्चा चिट्ठा अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के सामने खोल दिया।

20 महीने से नहीं हुई बैठक, अंधेरे में रखे जा रहे सदस्य

जनपद सदस्यों का सबसे गंभीर आरोप जनपद अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की कार्यप्रणाली पर है। सदस्यों ने तल्ख लहजे में कहा कि पिछले 20 महीनों से सामान्य सभा की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जहां चर्चा और अनुमोदन से विकास कार्य होने चाहिए, वहां गंगेव जनपद में पिछले 2 साल से सामान्य प्रशासन समिति की बैठक तक ठप पड़ी है। आरोप है कि बिना किसी चर्चा या अनुमोदन के करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का बंदरबांट किया जा रहा है।

करोड़ों का खेल: वित्तीय अनियमितता के संगीन आरोप

ज्ञापन के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं। सदस्यों का कहना है कि:

  • 15वें और 6वें वित्त की राशि का वितरण किन पंचायतों में और कितना किया गया, इसकी जानकारी सदस्यों से छिपाई जा रही है।

  • जनपद सदस्यों को दरकिनार कर केवल चुनिंदा पंचायतों में ही राशि झोंकी जा रही है।

  • बिना सामान्य सभा के अनुमोदन के विकास कार्यों का संचालन कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही जनता

एक ओर जहां प्रशासनिक स्तर पर राशि का खेल चल रहा है, वहीं दूसरी ओर गंगेव जनपद की जनता भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि पूरे क्षेत्र में पेयजल और बिजली की भारी किल्लत है। हैंडपंप खराब पड़े हैं और मोटर पंप सुधारने की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं, शासन से बजट उपलब्ध होने के बावजूद खुद जनपद सदस्यों को उनके मानदेय का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है।

15 दिन का अल्टीमेटम: अब होगी 'आर-पार' की जंग

ज्ञापन सौंपने वालों में जनपद उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह, दिलीप कुमार दुबे, अखिलेश पटेल समेत कई वरिष्ठ सदस्य शामिल रहे। इन्होंने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। सदस्यों ने दो टूक कहा है कि यदि निर्धारित समय के भीतर बैठकें आयोजित नहीं हुईं और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच कर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वे भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'विस्फोटक' स्थिति को कैसे संभालता है या गंगेव की राजनीति में और बड़ा भूचाल आता है।

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