बालाघाट में संघ की ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ संपन्न; राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता का शंखनाद Aajtak24 News

बालाघाट में संघ की ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ संपन्न; राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता का शंखनाद Aajtak24 News

बालाघाट - विजयदशमी 1925 को रोपा गया राष्ट्रभक्ति का वह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने गौरवशाली इतिहास के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बालाघाट के स्थानीय सांदीपनी विद्यालय सभागार में एक भव्य “प्रमुख जन गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों का ऐसा समागम हुआ, जिसने राष्ट्र प्रथम की भावना को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

संस्कार और सेवा के 100 वर्ष: एक ऐतिहासिक यात्रा

शताब्दी वर्ष के इस विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ परम पूज्य आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सभागार में उपस्थित जनसमूह की अनुशासित उपस्थिति ने संघ की कार्यपद्धति का जीवंत परिचय दिया। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन संपर्क प्रमुख डॉ. अविनाश कुमार द्वारा किया गया, जिन्होंने संघ के 100 वर्षों के संघर्ष, सेवा और समाज के सर्वांगीण विकास में संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता का उद्बोधन: "भारत केवल भूगोल नहीं, सांस्कृतिक चेतना है"

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्रीमान प्रवीणजी गुप्त ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा, "भारत केवल एक भौगोलिक इकाई या मिट्टी का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक महान और अविनाशी सांस्कृतिक चेतना है।"

प्रवीणजी ने आगे जोर देते हुए कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष केवल एक उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक सशक्त रूप से निभाने का एक पवित्र संकल्प है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र का पुनर्निर्माण करना है।

संस्कार और नैतिकता ही राष्ट्र की आधारशिला

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सांदीपनी विद्यालय के प्राचार्य डॉ. युवराजजी रांगेडाले ने शिक्षा और संस्कारों के समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान के आधुनिक युग में भारतीय संस्कृति और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे अनुशासन, निस्वार्थ सेवा और अटूट राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को अपने जीवन में उतारें।

सार्थक चर्चा और जिज्ञासा समाधान

गोष्ठी के दौरान केवल व्याख्यान ही नहीं हुए, बल्कि समाज की ज्वलंत समस्याओं और भारतीय जीवन मूल्यों पर सार्थक विमर्श भी हुआ। सामाजिक समरसता, सुदृढ़ परिवार व्यवस्था और युवा शक्ति की भूमिका जैसे विषयों पर गहराई से चर्चा की गई। उपस्थित नागरिकों ने प्रश्नोत्तरी सत्र के माध्यम से संघ के आगामी विजन और राष्ट्र व्यापी कार्यों के बारे में अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं।

आभार और समापन

कार्यक्रम के अंत में नगर कार्यवाह श्री संदीप लिलहरे ने सभी अतिथियों, प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और युवाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि बालाघाट का प्रत्येक स्वयंसेवक शताब्दी वर्ष के संकल्पों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। शताब्दी वर्ष का यह आयोजन समाज में एकता, संस्कार और राष्ट्र प्रेम का एक अमिट संदेश छोड़ गया। 100 वर्षों की लंबी यात्रा पूरी करने के बाद संघ अब 'स्व' आधारित भारत के निर्माण के लिए एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

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