| जहां गोलियों की गूंज थी, वहां अब ‘हरा सोना’ और टीवी की रोशनी—गोगुण्डा की बदली तकदीर या नई कहानी? Aajtak24 News |
सुकमा - जिले के कोंटा विकासखंड का अंतिम छोर, गोगुण्डा पंचायत—जहां कभी नक्सलियों की समानांतर सत्ता का दबदबा था—आज बदलाव की नई मिसाल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासनिक प्रयासों ने इस सुदूर क्षेत्र में विकास की एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। पहाड़ियों के बीच बसे गोगुण्डा और उसके आश्रित गांव मीचिगुड़ा में अब बंदूकों की आवाज थम चुकी है और उसकी जगह विकास और उम्मीदों की आवाज सुनाई दे रही है। जिला प्रशासन ने यहां लगभग 1 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी है, जिससे 1600 से अधिक ग्रामीणों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस बदलाव की खास बात यह है कि यहां सिर्फ बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन को भी संवारने की कोशिश की जा रही है। पंचायत में पीडीएस भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी के साथ एक आधुनिक मनोरंजन कक्ष बनाया जा रहा है, जहां बड़ी स्क्रीन पर ग्रामीण फिल्में, क्रिकेट मैच और खबरें देख सकेंगे। यह पहल गांव को देश-दुनिया से जोड़ने का एक नया माध्यम बन सकती है। आर्थिक रूप से भी गोगुण्डा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आजादी के बाद पहली बार यहां तेंदूपत्ता की खरीदी 27 अप्रैल से शुरू हो गई है। ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ते की खरीदी से करीब 200 परिवारों को रोजगार मिला है। अब ग्रामीण बिना डर के फड़ तक पहुंच रहे हैं और अपनी मेहनत का उचित मूल्य पा रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। फड़ मुंशी के रूप में मुचाकी गंगी की नियुक्ति ने यह साबित किया है कि अब महिलाएं भी नेतृत्व की भूमिका में आगे आ रही हैं। गांव में हाल ही में पहुंची बिजली ने जीवन को आसान बना दिया है और अब ग्रामीण सिर्फ पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर नहीं हैं। कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, प्रशासन का लक्ष्य गोगुण्डा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। यहां चल रहे कार्य न केवल बुनियादी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत कर रहे हैं। गोगुण्डा की यह कहानी बस्तर के बदलते हालातों की एक जीवंत तस्वीर पेश करती है—जहां कभी डर था, वहां अब विकास और भरोसे की नींव रखी जा रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- क्या गोगुण्डा में दिख रहा विकास स्थायी है या सिर्फ कुछ परियोजनाओं तक सीमित रहेगा, और इसकी दीर्घकालिक निगरानी कैसे सुनिश्चित होगी?
- तेंदूपत्ता खरीदी से जुड़े ग्रामीणों को क्या वास्तव में उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिल रहा है, या बीच में बिचौलियों की भूमिका अभी भी मौजूद है?
- मनोरंजन कक्ष जैसी योजनाएं सराहनीय हैं, लेकिन क्या क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही तेजी से विकसित हो रही हैं?