खरगोन; नल से पानी या परेशानी? खरगोन–कसरावद की जल योजनाओं पर सख्ती Aajtak24 News

खरगोन; नल से पानी या परेशानी? खरगोन–कसरावद की जल योजनाओं पर सख्ती Aajtak24 News

खरगोन - खरगोन और कसरावद नगरों में चल रही जलावर्धन योजनाओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी की खरगोन इकाई द्वारा दोनों नगरों में जल प्रदाय व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें पानी आपूर्ति की गुणवत्ता और शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया गया।खरगोन में विश्व बैंक सहायतित जलावर्धन योजना की समीक्षा नगर पालिका कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान की गई। इस बैठक में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज पानी से जुड़ी शिकायतों, विशेषकर दूषित जल की समस्या, पाइपलाइन लीकेज और जल अपव्यय के मामलों पर गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन शिकायतों का तुरंत निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत, खुदाई के बाद सड़कों की पुनर्स्थापना, नए जल कनेक्शन जारी करने और नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कसरावद में आयोजित अलग समीक्षा बैठक में जल आपूर्ति की नियमितता और दबाव (प्रेशर) से जुड़ी समस्याओं पर फोकस किया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि कम प्रेशर की समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जाए और निर्धारित क्षेत्रों में सुचारु एवं नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

दोनों बैठकों में यह भी कहा गया कि सभी कार्य नियमों के अनुसार और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरे किए जाएं, ताकि भविष्य में नागरिकों को जल संकट या असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठकों में संबंधित नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, उपयंत्री और परियोजना से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। समन्वय का कार्य सहायक परियोजना प्रबंधक श्री विजय बघेल और सामुदायिक विकास अधिकारी द्वारा किया गया। सरकारी स्तर पर यह प्रयास जल प्रदाय व्यवस्था को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतें यह भी संकेत देती हैं कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जलावर्धन योजना पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद सीएम हेल्पलाइन पर लगातार शिकायतें क्यों आ रही हैं? क्या यह योजना अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही?
  2. पाइपलाइन लीकेज और कम प्रेशर जैसी बुनियादी समस्याएं वर्षों से क्यों बनी हुई हैं—क्या यह तकनीकी कमी है या रखरखाव में लापरवाही?
  3. निर्देश तो बार-बार दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार कितने समय में दिखाई देगा और इसके लिए जिम्मेदारी तय करने की कोई सख्त व्यवस्था क्यों नहीं दिखती?

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