![]() |
| बड़वानी; फील्ड में शून्य उपस्थिति पर गिरी गाज… बड़वानी में कलेक्टर सख्त, 3 इंजीनियरों का वेतन कटा Aajtak24 News |
बड़वानी - जिले में चल रहे “जलगंगा संवर्धन अभियान” और “जल संचय–जन भागीदारी अभियान” की समीक्षा बैठक में प्रशासन ने लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। कलेक्ट्रेट सभागृह में हुई बैठक के दौरान फार्म पॉण्ड, डगवेल, अमृत सरोवर और वाटरशेड डेवलपमेंट जैसे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। समीक्षा में यह सामने आया कि कुछ विकासखंडों में डेली लेबर टर्नअप यानी श्रमिकों की उपस्थिति शून्य पाई गई, जिस पर कलेक्टर ने गंभीर नाराजगी जताई।
स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित सब इंजीनियरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया और जवाब तलब किया। निरीक्षण में लापरवाही और सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में कमी पाए जाने पर 3 सब इंजीनियरों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों की गति बढ़ाई जाए और प्रतिदिन कार्यों का “रन रेट” सुधारकर तय लक्ष्य समय पर पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी निर्माण कार्य शासन द्वारा निर्धारित SOP के अनुसार ही किए जाएं और संबंधित अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें। साथ ही श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर जल संरचनाओं के कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया। बैठक में सहायक कलेक्टर श्री माधव अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर श्री रवि वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन का कहना है कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में जमीनी स्तर पर लापरवाही विकास कार्यों की गति को प्रभावित करती है, इसलिए अब निगरानी और सख्ती दोनों को बढ़ाया जाएगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि कई विकासखंडों में श्रमिकों की उपस्थिति शून्य मिली, तो क्या यह केवल इंजीनियरों की लापरवाही है या पूरी मॉनिटरिंग व्यवस्था ही कमजोर है?
- वेतन काटने की कार्रवाई तो हो गई, लेकिन क्या आगे ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए स्थायी निगरानी और दंडात्मक प्रणाली भी लागू की जाएगी?
- जलगंगा संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण अभियान में समय-सीमा और लक्ष्य पहले से तय हैं, फिर भी कार्यों की गति धीमी क्यों है—क्या बजट, योजना या क्रियान्वयन स्तर पर बड़ी खामियां हैं?
