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| प्रशासन को सीधी चुनौती: रेलवे की चुप्पी कहीं बड़े भ्रष्टाचार की ढाल तो नहीं? Aajtak24 News |
अनूपपुर/शहडोल - रेलवे की संपत्ति देश की अमानत है, लेकिन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कुछ खंडों में वर्तमान स्थितियां इसके उलट दिखाई दे रही हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, यदि शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और पाली क्षेत्र के कबाड़ गोदामों की सघन जांच की जाए, तो रेलवे के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
अधिकारियों की 'गुड बुक' और जमीनी हकीकत आरोप है कि उच्च अधिकारी केवल अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की 'गुड बुक' वाली रिपोर्टों पर भरोसा कर रहे हैं। यदि आलाकमान ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो रेलवे को होने वाले करोड़ों के नुकसान और विभाग की बदनामी की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर शीर्ष अधिकारियों की होगी। यह रिपोर्ट सोए हुए तंत्र को जगाने की एक हुंकार है कि रेलवे किसी माफिया की जागीर नहीं है।
इन प्रमुख बिंदुओं पर उठ रही है जांच की मांग:
गोदामों का औचक निरीक्षण: शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और चंदिया पाली के कबाड़ गोदामों की तत्काल और गुप्त जांच की जाए।
कॉल डिटेल्स (CDR) की पड़ताल: संबंधित प्रभारियों और आरपीएफ (RPF) टीम के सीडीआर की जांच हो, ताकि माफिया और अधिकारियों के बीच के कथित गठजोड़ का पर्दाफाश हो सके।
मेडिकल बोर्ड से परीक्षण: जांच के समय अक्सर अधिकारी 'बीमारी' का बहाना बनाकर बच निकलते हैं। ऐसे अधिकारियों का मेडिकल बोर्ड से परीक्षण अनिवार्य किया जाए।
'मोहसिन' मामले का रहस्य: क्षेत्र में चर्चा का विषय बने 'मोहसिन' मामले में प्रेस नोट जारी न होना और केस को रफा-दफा करने की कोशिशों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों और सूत्रों के दावों पर आधारित है। इसका एकमात्र उद्देश्य रेल प्रशासन को विभाग के भीतर पनप रहे भ्रष्टाचार के प्रति आगाह करना और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब देखना यह है कि रेल प्रशासन इस 'हुंकार' को कितनी गंभीरता से लेता है।
