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| उज्जैन; तालाब, चेकडैम और अमृत सरोवर पर प्रशासन की नजर… गांव-गांव पहुंचकर परखी विकास कार्यों की असली तस्वीर Aajtak24 News |
उज्जैन - जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी प्रगति को परखने के लिए प्रशासन ने मैदानी निरीक्षण तेज कर दिए हैं। बुधवार को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उज्जैन श्री श्रेयांस कूमट ने जनपद पंचायत महिदपुर अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों का दौरा कर जल गंगा संवर्धन अभियान और अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत खेड़ा खजुरिया, लसुड़िया मनसूर, गोगापुर, कानाखेड़ी एकलासपुर और बयैया में चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, तालाब जीर्णोद्धार और पंचायत स्तरीय अधोसंरचना से जुड़े कार्यों का स्थल पर निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
ग्राम पंचायत खेड़ा खजुरिया में आंगनवाड़ी भवन परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बनाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और कवर्ड नाली का निरीक्षण किया गया। वहीं ग्राम पंचायत लसुड़िया मनसूर में निर्माणाधीन चेकडैम का अवलोकन करते हुए अधिकारियों ने आसपास स्थित कपिल धारा कूप में बढ़े जल स्तर का निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय किसानों को फसल परिवर्तन यानी क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन अपनाने की सलाह भी दी गई, ताकि जल उपलब्धता के अनुसार खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
ग्राम पंचायत गोगापुर में प्रस्तावित वृक्षारोपण स्थल का निरीक्षण किया गया। यहां एडीबी बैंक के सीएसआर फंड से चल रहे तालाब जीर्णोद्धार कार्य की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।इसके अलावा ग्राम पंचायत कानाखेड़ी एकलासपुर में अटल पंचायत भवन और शांतिधाम का निरीक्षण कर आसपास पौधारोपण कराने के निर्देश दिए गए। वहीं ग्राम पंचायत बयैया में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रगतिरत अमृत सरोवर कार्य का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत महिदपुर की सीईओ श्रीमती मीना झा, जनपद सदस्य प्रताप सिंह परिहार, जनपद सदस्य प्रतिनिधि बाबूदास बैरागी, तकनीकी अमला, सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जल संरक्षण और तालाब जीर्णोद्धार के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर और सिंचाई संकट क्यों बना हुआ है?
- CSR फंड और सरकारी योजनाओं से हो रहे कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कौन करेगा, ताकि निर्माण कार्य केवल कागजों में सीमित न रह जाएं?
- अमृत सरोवर, चेकडैम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी परियोजनाओं के रखरखाव की दीर्घकालिक जिम्मेदारी किसकी होगी, ताकि कुछ वर्षों बाद ये संरचनाएं फिर जर्जर न हो जाएं?
