| बीजापुर; दवा की दुकानों पर ‘छापा हेल्थ मॉडल’: बीजापुर में एक्सपायरी पर बुलडोज़र Aajtak24 News |
बीजापुर - जिले में “सही दवा–शुद्ध आहार” अभियान के तहत प्रशासन ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 1 मई को औषधि प्रकोष्ठ द्वारा विकासखंड भोपालपटनम सहित शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें मेडिकल स्टोर से लेकर कॉस्मेटिक और फैंसी दुकानों तक की गहन जांच की गई। जांच के दौरान एक्सपायरी कॉस्मेटिक उत्पादों को मौके पर ही नष्ट कराया गया। अधिकारियों ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए साफ कहा कि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मेडिकल दुकानों में दवाओं के भंडारण, रिकॉर्ड संधारण और क्रय-विक्रय प्रक्रिया की बारीकी से जांच की गई। बिलों का सत्यापन, दवाओं की लेबलिंग—जैसे निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बैच नंबर—सहित भंडारण व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। अधिकांश दुकानों में व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, लेकिन कुछ स्थानों पर सुधार के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य विभाग ने विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे केवल लाइसेंसधारी स्रोतों से ही उत्पाद खरीदें और नकली या डुप्लिकेट सामान से सतर्क रहें। साथ ही शासकीय अस्पतालों में वैक्सीन की कोल्ड चेन व्यवस्था की भी जांच की गई, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीकों की गुणवत्ता बनी रहे।
जन जागरूकता के तहत जिला अस्पताल में डॉ. राहुल राठौर की मौजूदगी में एंटीबायोटिक के दुरुपयोग और दवाओं के दुष्प्रभाव (एडवर्स ड्रग रिएक्शन) की जानकारी दी गई। नशा मुक्ति अभियान के तहत मेडिकल दुकानों का निरीक्षण किया गया, जिसमें नारकोटिक और GLP-1 श्रेणी की दवाएं नहीं पाई गईं, लेकिन नियमों की जानकारी जरूर दी गई। इसी दौरान कोटपा (COTPA) अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचने और सेवन करने वालों पर कार्रवाई करते हुए 24 चालान काटे गए और 4800 रुपये की वसूली की गई। इस पूरे अभियान में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे जिले में स्वास्थ्य मानकों को सख्ती से लागू करने का संदेश गया है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- अगर अधिकांश दुकानों की व्यवस्था संतोषजनक है, तो फिर एक्सपायरी और नकली उत्पाद बाजार में पहुंच कैसे रहे हैं—क्या निगरानी तंत्र कमजोर है?
- कोटपा के तहत 24 चालान तो बने, लेकिन क्या यह कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी या सिर्फ अभियान तक सीमित रह जाएगी?
- एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर जागरूकता दी जा रही है, लेकिन क्या डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही तय करने के लिए कोई सख्त नीति लागू की जाएगी?