| बीजापुर; अब दफ्तर नहीं, सरकार खुद आई दरवाज़े पर: क्या ‘बस्तर मुन्ने’ सच में बदल रहा ग्रामीणों की किस्मत? Aajtak24 News |
बीजापुर - छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन और जनकल्याण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से “बस्तर मुन्ने” कार्यक्रम के तहत सैचुरेशन शिविरों का आयोजन तेज़ी से किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में रह रहे लोगों को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देशन में आयोजित इन शिविरों में प्रशासनिक टीम गांव-गांव जाकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शिविरों की नियमित निगरानी एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा की जा रही है, ताकि पारदर्शिता और कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे।
ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही बी-1 खसरा (भूमि दस्तावेज), आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, आभा कार्ड और वय वंदना कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज बनाकर दिए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत उसूर ब्लॉक के ग्राम संकनपल्ली में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को बी-1 खसरा वितरित किया गया। अपने गांव में ही आवश्यक दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखने को मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से अब उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय पर सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए इसे राहत देने वाला कदम बताया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या प्रशासन यह सुनिश्चित कर सकता है कि शिविर खत्म होने के बाद भी ग्रामीणों को इसी तरह त्वरित सेवाएं मिलती रहेंगी, या यह सुविधा सिर्फ अभियान तक सीमित है?
- क्या इन शिविरों में वितरित किए गए दस्तावेजों की गुणवत्ता और वैधता की स्वतंत्र जांच होगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की त्रुटि सामने न आए?
- सरकार ‘शत-प्रतिशत सैचुरेशन’ की बात कर रही है—क्या इसके लिए कोई पारदर्शी डेटा सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे असल स्थिति का आंकलन हो सके?