| सुकमा; नक्सल साए से निकलकर आंकड़ों में दर्ज हुआ पुवर्ती: 3 दिन में जनगणना पूरी Aajtak24 News |
सुकमा - कभी नक्सल प्रभाव के कारण डर और अनिश्चितता का प्रतीक रहा कोंटा विकासखंड का ग्राम पुवर्ती अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिले में जनगणना कार्य के पहले चरण में पुवर्ती ऐसा पहला गांव बन गया, जहां यह कार्य रिकॉर्ड समय—सिर्फ 3 दिनों में पूरा कर लिया गया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए कलेक्टर अमित कुमार ने प्रगणक जवाराम पटेल को सम्मानित किया। सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत पटेल ने लगभग 950 से अधिक आबादी और 234 मकानों वाले इस गांव में जनगणना का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया। गांव में 2 आंगनबाड़ी केंद्र और 1 स्कूल संचालित है, जिससे इसकी सामाजिक संरचना को समझने में भी मदद मिली।
जनगणना के दौरान भाषा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई, क्योंकि स्थानीय गोंडी बोली को समझना आसान नहीं था। इसके बावजूद पटेल ने स्थानीय शिक्षकों के सहयोग से हर घर तक पहुंच बनाकर सर्वे कार्य पूरा किया। पुवर्ती गांव, जो पहले घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, अब प्रशासनिक सक्रियता और नक्सल उन्मूलन प्रयासों के चलते तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। सरकारी योजनाओं की पहुंच और जनभागीदारी में बढ़ोतरी इसका प्रमाण है।
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि जवाराम पटेल का समर्पण और साहस अन्य कर्मियों के लिए प्रेरणा है। इस अवसर पर तहसीलदार एवं चार्ज अधिकारी जगरगुण्डा ग्रामीण योपेंद्र पात्रे भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- पुवर्ती को ‘बदलाव की मिसाल’ बताया जा रहा है—क्या प्रशासन यह आंकड़े सार्वजनिक करेगा कि जिले के अन्य नक्सल प्रभावित गांवों में स्थिति अभी भी कितनी पीछे है?
- सिर्फ 3 दिनों में जनगणना पूरी करना उपलब्धि है, लेकिन क्या इतनी तेजी में डेटा की सटीकता और गुणवत्ता से समझौता नहीं हुआ?
- भाषा जैसी बुनियादी समस्या सामने आई—क्या भविष्य में ऐसे कार्यों के लिए स्थानीय भाषा जानने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति पर कोई ठोस योजना है?