रीवा: पशु तस्करों की 'अघोषित मंडी' बना गढ़, किसान की सूझबूझ से भैंस चोरी की साजिश नाकाम Aajtak24 News

रीवा: पशु तस्करों की 'अघोषित मंडी' बना गढ़, किसान की सूझबूझ से भैंस चोरी की साजिश नाकाम Aajtak24 News

रीवा - रीवा जिले के गढ़ क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए अब पशु तस्करों ने भी अपना डेरा जमा लिया है। क्षेत्र की स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि स्थानीय लोग अब गढ़ को पशु तस्करों के एक 'अघोषित केंद्र' के रूप में देखने लगे हैं। बीती रात एक सजग किसान की सतर्कता के कारण पशु तस्करी की एक बड़ी वारदात होने से टल गई।

मध्य रात्रि को बाड़े में घुसा तस्कर

यह घटना शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 1:20 बजे की है। ग्राम पंचायत गढ़ के मोजरा गांव निवासी किसान रावेंद्र पटेल ने बताया कि जब वे रात के समय अचानक बाहर निकले, तो उन्होंने देखा कि एक अज्ञात व्यक्ति उनके बाड़े में उनकी चार भैंसों के बीच संदिग्ध अवस्था में खड़ा है। जैसे ही किसान उस व्यक्ति की ओर बढ़ा, आरोपी घबराकर वहां से भागने लगा।

आरोपी की पहचान: पहले भी दे चुका था लालच

पीड़ित किसान रावेंद्र पटेल के अनुसार, भागते समय आरोपी के मुंह से निकले कुछ शब्दों के आधार पर उसकी पहचान गढ़ निवासी अफजल के रूप में हुई है। किसान ने बताया कि अफजल पूर्व में भी कई बार उनके पास आकर इन भैंसों को बेचने का दबाव बना चुका था। रावेंद्र ने हर बार स्पष्ट रूप से मना कर दिया था कि वे एक किसान हैं और ये भैंसें उनके परिवार की जरूरतों के लिए हैं, न कि व्यापार के लिए।

गढ़ बना 50 किमी दायरे का 'कलेक्शन सेंटर'

स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गढ़ क्षेत्र अब आसपास के 50 किलोमीटर के दायरे से चोरी किए गए या डरा-धमकाकर छीने गए पशुओं का संग्रहण केंद्र बन गया है। रात के सन्नाटे में यहाँ पशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त का खेल चलता है, जिसके बाद उन्हें बड़े ट्रकों में भरकर गुप्त रास्तों से अन्य प्रदेशों या शहरों में भेज दिया जाता है।

भय के साये में पशुपालक: पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग

पशुपालन पर निर्भर किसानों का कहना है कि गढ़ में यह काला कारोबार पुलिस की सुस्ती के कारण फल-फूल रहा है। अब किसान अपने ही पशुओं की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित हैं कि उन्हें रात-भर जागकर पहरेदारी करनी पड़ रही है। पीड़ित किसान ने गढ़ थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराकर आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अब क्षेत्रीय जनता के बीच यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या पुलिस इस संगठित पशु तस्करी गिरोह को ध्वस्त कर पाएगी, या फिर मेहनतकश किसान इसी तरह अपनी जीविका खोने के डर में जीते रहेंगे।



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