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| उमरिया; बांधवगढ़ के पर्यटन पर ‘जंग’ लगी तस्वीर! कलेक्टर ने देखी बदहाल आजीविका मार्ट की हकीकत Aajtak24 News |
उमरिया - जिले के ताला क्षेत्र में पर्यटन और आजीविका से जुड़ी व्यवस्थाओं की बदहाल स्थिति उस समय सामने आई, जब कलेक्टर राखी सहाय ने आजीविका मार्ट और महुआ उत्पादन सह प्रशिक्षण वन चेतना केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों भवन जर्जर अवस्था में पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए सुधार और मरम्मत के निर्देश दिए।
ताला क्षेत्र, जो बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों का प्रमुख प्रवेश क्षेत्र माना जाता है, वहां आजीविका मार्ट की हालत काफी खराब मिली। कलेक्टर ने कहा कि केवल दुकान संचालन तक सीमित रहने के बजाय यहां “दीदी कैफे” भी शुरू किया जाए, ताकि पर्यटकों को स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिल सके तथा महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हों। निरीक्षण के दौरान महुआ उत्पादन सह प्रशिक्षण वन चेतना केंद्र की इमारत भी जर्जर हालत में पाई गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य कराने और केंद्र को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने संकेत दिए कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े ऐसे केंद्र केवल औपचारिकता बनकर न रहें, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और जिले की पहचान को मजबूत करने का माध्यम बनें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बांधवगढ़ आने वाले सैलानियों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और उत्पादों से जोड़ने की ठोस व्यवस्था बनाई जाए। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह, एसडीएम मानपुर हरनीत कौर कलसी और जनपद पंचायत सीईओ मानपुर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब ताला और बांधवगढ़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर हैं, तो फिर आजीविका मार्ट और वन चेतना केंद्र जैसी महत्वपूर्ण जगहें जर्जर हालत में कैसे पहुंच गईं?
- क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि अब तक आजीविका मार्ट से स्थानीय महिलाओं और समूहों को वास्तविक आर्थिक लाभ कितना मिला है, या यह योजना सिर्फ कागजों में सीमित रही?
- ‘दीदी कैफे’ शुरू करने की घोषणा तो हुई, लेकिन क्या इसके लिए बजट, संचालन मॉडल और स्थानीय महिला समूहों का चयन पहले से तय है या यह भी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रहेगा?
