परंपरागत नहर नहीं, अब पाइप से पहुंचेगा पानी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना "हर बूंद से अधिक उत्पादन" (More Crop Per Drop) के विजन को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि अब किसानों को सिंचाई के लिए केवल वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक खुली नहरों के बजाय प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क (Underground Pipeline) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे न केवल पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि भूमि अधिग्रहण की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
13 गांवों के किसानों की बदलेगी तकदीर
मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज के माध्यम से इस योजना का लाभ बगिया, डोकड़ा, बांसबहार, उसकुटी और सिकरिया समेत कुल 13 गांवों के किसानों को मिलेगा। लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में सालभर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी और नकदी फसलें भी ले सकेंगे।
देश की चुनिंदा परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का 'बगिया क्लस्टर'
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि भारत सरकार ने देश के 23 राज्यों में कुल 34 एम-कैड परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 95.89 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है।
हाईटेक होगी खेती: सौर ऊर्जा और IoT का तालमेल
यह परियोजना केवल पाइप बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह हाईटेक होगी:
SCADA और IoT तकनीक: जल वितरण का डेटा-आधारित प्रबंधन होगा, जिससे वैज्ञानिक तरीके से तय होगा कि किस खेत को कितना पानी चाहिए।
सौर ऊर्जा: पंपिंग और वितरण प्रणाली के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण: योजना के संचालन और रखरखाव में 'जल उपभोक्ता समितियों' के माध्यम से महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी
इस गौरवशाली अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगी। वहीं, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए "आने वाले समय का वरदान" करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में स्थायी सुधार होगा और वे जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से निपटने में सक्षम बनेंगे।
समय सीमा और जिम्मेदारी
स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को अगले 6 माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। शुरुआत के 5 वर्षों तक इसका संधारण ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद इसे स्थानीय किसानों की समितियों को सौंप दिया जाएगा।
आज तक 24 न्यूज़ का विश्लेषण: जशपुर में शुरू हुई यह योजना छत्तीसगढ़ में कृषि के आधुनिकीकरण का नया अध्याय है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अपने गृह क्षेत्र से इस वैश्विक तकनीक की शुरुआत करना यह दर्शाता है कि सरकार ग्रामीण विकास और उन्नत कृषि को लेकर कितनी गंभीर है।
