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| गेहूं खरीदी में देरी पर कमिश्नर सख्त! बोले— किसान इंतजार नहीं करेगा, उसी दिन हो भुगतान की प्रक्रिया Aajtak24 News |
सतना - जिले में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब पूरी सतर्कता के साथ निगरानी कर रहा है। किसानों की शिकायतों और खरीदी प्रक्रिया में संभावित देरी को देखते हुए रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने रविवार को रामपुर बघेलान उपज मंडी पहुंचकर उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने खरीदी व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया और किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने उपार्जन केंद्रों का संचालन कर रहे स्व सहायता समूहों और समितियों को निर्देश दिए कि स्लॉट बुकिंग के अनुसार किसानों की उपज की खरीदी समय पर की जाए और उसी दिन उसका इन्द्राज सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को भुगतान में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। कमिश्नर बीएस जामोद ने खरीदे गए गेहूं के समय पर परिवहन को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि ट्रांसपोर्टेशन में देरी होती है तो खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था बढ़ती है और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि परिवहन व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
रामपुर बघेलान मंडी में फिलहाल तीन उपार्जन केंद्रों पर गेहूं खरीदी की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर और कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बचबई ग्राम पंचायत के रेऊरा स्थित सेलो उपार्जन केंद्र का भी दौरा किया। यहां किसानों के लिए छाया, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति देखी गई। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। प्रशासन के मुताबिक रेऊरा सेलो से चार स्व सहायता समूहों और तीन समितियों के उपार्जन केंद्र संबद्ध हैं, जिसके कारण यहां खरीदी का दबाव अधिक है। इसी को देखते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम सुभाष मिश्रा, जिला प्रबंधक नान पंकज बोरसे, केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंधक एससी गुप्ता, जिला आपूर्ति अधिकारी सम्यक जैन सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि हर साल उपार्जन केंद्रों पर भुगतान में देरी, ट्रांसपोर्टेशन की धीमी रफ्तार और किसानों को पर्याप्त सुविधाएं न मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रशासनिक निरीक्षणों के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कितनी सुधरती हैं, इस पर किसानों की नजर बनी हुई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि प्रशासन लगातार निरीक्षण कर रहा है, तो फिर हर साल किसानों को भुगतान में देरी और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था की शिकायतें क्यों मिलती हैं?
- कमिश्नर ने उसी दिन इन्द्राज और भुगतान प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन क्या सभी उपार्जन केंद्रों पर इतनी तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता वास्तव में उपलब्ध है?
- खरीदे गए गेहूं के समय पर ट्रांसपोर्टेशन के निर्देश दिए गए हैं, तो पिछले वर्षों में परिवहन में हुई देरी और अनाज खराब होने के मामलों में कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
