मंडला; अधिकारियों ने बच्चों के साथ किया भोजन… मवई में आंगनवाड़ी और अस्पताल व्यवस्थाओं की खुली पोल Aajtak24 News

मंडला; अधिकारियों ने बच्चों के साथ किया भोजन… मवई में आंगनवाड़ी और अस्पताल व्यवस्थाओं की खुली पोल Aajtak24 News

मंडला - जिले के मवई विकासखंड में स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रशासन ने मंगलवार को संयुक्त निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे के निर्देश पर एसडीएम बिछिया सुश्री सोनाली देव और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने क्षेत्र का दौरा कर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण की शुरुआत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीनाला से हुई, जहां अधिकारियों ने उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं के स्टॉक और जांच सुविधाओं का विस्तार से अवलोकन किया। इसके बाद टीम ने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चांदगांव और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खिलौड़ी का भी निरीक्षण किया।

सबसे अहम पहलू आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच रहा। अधिकारियों ने न सिर्फ भोजन की स्थिति देखी, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आंगनवाड़ी में बच्चों के साथ बैठकर भोजन भी किया। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को मिलने वाले पोषण की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन करना था। निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थागत कमियां सामने आईं, जिन पर एसडीएम सुश्री सोनाली देव ने गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तुरंत सुधार के निर्देश दिए और स्पष्ट कहा कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने भी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाओं को और मजबूत करने तथा दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के संयुक्त निरीक्षणों का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझकर सुधार करना है। यह दौरा इस बात की ओर भी इशारा करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की निगरानी लगातार मजबूत करने की जरूरत है, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों और ग्रामीणों तक पहुंच सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब निरीक्षण में आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों में कमियां सामने आईं, तो क्या यह माना जाए कि नियमित मॉनिटरिंग प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही?
  2. अधिकारियों को खुद भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए बच्चों के साथ बैठना पड़ा, तो क्या पहले से कोई मानक निरीक्षण व्यवस्था काम नहीं कर रही थी?
  3. ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं पर भारी बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कमियां क्यों मिल रही हैं—क्या समस्या संसाधनों की है या क्रियान्वयन की?

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