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| बालाघाट; 500 दिन से लटकी शिकायतों पर ‘कलेक्टर का एक्शन मोड Aajtak24 News |
बालाघाट - जिले में सीएम हेल्पलाइन की वर्षों से लंबित शिकायतों को लेकर कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग की शिकायतों की समक्ष में सुनवाई की। इस दौरान 500 दिनों से भी अधिक समय से लंबित मामलों की बारीकी से समीक्षा की गई और संबंधित पटवारियों व राजस्व अधिकारियों से जवाब तलब किया गया। सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने शिकायतकर्ताओं को सीधे बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही कई मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान अपर कलेक्टर श्री डीपी बर्मन और अधीक्षक भू-अभिलेख श्री कृष्णा नायक भी मौजूद रहे।
खैरलांजी तहसील के पिंडकेपार गांव में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामले में 500 दिनों से लंबित शिकायत पर पटवारी आयुष सिंघल की लापरवाही सामने आई। इस पर कलेक्टर ने कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि भविष्य में अतिक्रमण जारी पाया गया तो संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता ने कार्रवाई से संतुष्टि जताते हुए प्रकरण वापस लेने पर सहमति दी। इसी तरह सावरगांव में 437 दिनों से लंबित सीमांकन मामले में पटवारी अंकित गंगभोज को दो दिन के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए और चेतावनी दी गई कि समयसीमा में काम न होने पर कार्रवाई तय है।
बालाघाट तहसील के खैरी गांव में 506 दिनों से लंबित अतिक्रमण और अवैध बिक्री के मामले में कलेक्टर ने एसडीएम से रिपोर्ट ली और संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध कॉलोनी निर्माण पर भी सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए। लांजी तहसील के एक मामले में 552 दिनों से लंबित जमीन नामांतरण विवाद में कलेक्टर ने एसडीएम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और पटवारी को नोटिस जारी किया गया। इसी तरह लालबर्रा और वारासिवनी क्षेत्र के मामलों में भी सीमांकन, अतिक्रमण और रिकॉर्ड सुधार से जुड़ी शिकायतों पर सख्त निर्देश जारी किए गए।
वारासिवनी के 711 दिनों से लंबित एक मामले में पटवारी को एसडीएम कोर्ट में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि लंबे समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतें प्रशासनिक लापरवाही का संकेत हैं और अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 500 से 700 दिन तक शिकायतें लंबित रहने का मतलब है कि राजस्व विभाग की मॉनिटरिंग प्रणाली पूरी तरह विफल रही—इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
- जब कलेक्टर स्तर पर सुनवाई के बाद ही कार्रवाई होती है, तो क्या इसका मतलब है कि निचले स्तर के अधिकारी शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे थे?
- बार-बार नोटिस और चेतावनी के बावजूद पटवारियों की लापरवाही जारी है—क्या केवल निलंबन की धमकी पर्याप्त है या कोई स्थायी जवाबदेही तंत्र भी बनाया जाएगा?
