| डिंडौरी; गांव के आंगन में ‘सरकारी दरबार’… चांड़ा पहुंचीं कलेक्टर, 22 शिकायतों का मौके पर निपटारा Aajtak24 News |
डिंडौरी - जिले के छत्तीसगढ़ सीमा से सटे दूरस्थ ग्राम पंचायत चांड़ा में मंगलवार को प्रशासनिक व्यवस्था का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया स्वयं गांव पहुंचीं और पंचायत प्रांगण में जनसुनवाई आयोजित की। जिला मुख्यालय से दूर और आवागमन की कठिनाइयों वाले बैगाचक क्षेत्र में हुई इस जनसुनवाई का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को उनके दरवाजे पर ही सुनकर समाधान करना था। कलेक्टर के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया और बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं।
जनसुनवाई में कुल 22 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें पेयजल, विद्युत, पेंशन, आवास, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, वनग्रामों में पट्टा नामांतरण, बीएसएनएल टॉवर, पशु चिकित्सालय, स्व-सहायता समूह ऋण, दिव्यांग प्रमाण पत्र और स्पांसरशिप योजना से जुड़े मामले प्रमुख रहे। कई मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, जबकि शेष प्रकरणों पर अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों की सुविधा के लिए जनसुनवाई के साथ स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें 144 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, शुगर, बीपी, गठियावात और बुखार जैसी जांचें की गईं और जरूरतमंदों को दवाइयां भी वितरित की गईं।
पेयजल समस्या पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पीएचई विभाग को ग्राम सिलपिडी में दो दिन के भीतर नया हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए। वहीं दादर टोला की सावनी बाई की शिकायत पर एक दिन में हैंडपंप लगाने और नल-जल योजना से सभी परिवारों को जोड़ने के आदेश दिए गए। सावनी बाई गोंडी चित्रकला के लिए जानी जाती हैं और भोपाल में भी अपनी कला से पहचान बना चुकी हैं, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील माना गया।
एक अन्य मामले में श्रीमती सुनिया बाई द्वारा पति के निधन के बाद दो बच्चों के भरण-पोषण की समस्या रखे जाने पर कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को स्पांसरशिप योजना के तहत दोनों बच्चों को 4000-4000 रुपये प्रतिमाह सहायता स्वीकृत करने के निर्देश दिए। वहीं पशु चिकित्सालय में डॉक्टर की अनुपस्थिति की शिकायत पर कलेक्टर ने संबंधित स्टाफ को तलब कर कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट निर्देश दिए कि चिकित्सालय प्रतिदिन सुबह 9 बजे से नियमित रूप से संचालित हो, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों को अपना मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया गया ताकि शिकायतें सीधे दर्ज हो सकें।
बैगाचक जैसे दूरस्थ क्षेत्र में पहुंचकर की गई यह जनसुनवाई प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या यह सही है कि दूरस्थ गांवों में जनसुनवाई तभी होती है जब कलेक्टर स्वयं पहुंचती हैं? नियमित प्रशासनिक तंत्र इन क्षेत्रों की समस्याएं पहले क्यों नहीं सुन पाता?
- 22 में से कई समस्याओं का मौके पर समाधान हुआ, लेकिन क्या यह व्यवस्था स्थायी है या केवल एक-दिवसीय दौरे तक सीमित रहती है?
- पशु चिकित्सालय में डॉक्टर की अनुपस्थिति जैसी गंभीर लापरवाही पर अब तक स्थायी निगरानी क्यों नहीं बनी, जिससे ग्रामीणों को बार-बार शिकायत करने की जरूरत पड़े?