| श्योपुर; नाव घाटों से लेकर पुल निर्माण तक सख्ती: कलेक्टर ने सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर कसा शिकंजा Aajtak24 News |
श्योपुर - कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने जिले में नाव घाटों की सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक में कई अहम मुद्दों की समीक्षा की गई।
नाव घाटों पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा नियम अनिवार्य
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले के सभी नाव घाटों पर सतत निगरानी रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नाव संचालन केवल लाइसेंस और निर्धारित SOP के अनुसार ही हो।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि—
- बिना लाइफ जैकेट नाव संचालन पर सख्त कार्रवाई हो
- बिना लाइसेंस नाव संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए
- रामेश्वर घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर नियमित जांच हो
- नदी किनारे बसे गांवों में नाव उपयोगकर्ताओं की सूची तैयार कर सुरक्षा मानक लागू किए जाएं
स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस—बाल रोग विशेषज्ञों की मांग
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सीएचसी कराहल और विजयपुर में बाल रोग विशेषज्ञों की पदस्थापना का प्रस्ताव जल्द स्वास्थ्य संचालनालय को भेजा जाए, ताकि बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहे।
सड़क सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट पर तकनीकी कार्रवाई
एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि—
- मोड़ और आबादी क्षेत्रों में संकेतक लगाए जाएं
- ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुरक्षा चिन्ह अंकित किए जाएं
- दुर्घटना संभावित स्थानों पर तकनीकी सुधार तुरंत किए जाएं
पुल निर्माण और आधारभूत ढांचा
सेतु निर्माण विभाग ने जानकारी दी कि—
- मेडिकल कॉलेज रोड पुल
- मानपुर पुल
दोनों कार्य 15 दिन में पूर्ण कर लिए जाएंगे
जनगणना और शिक्षा अभियान पर सख्ती
- 5 मई तक 10% जनगणना कार्य पूरा करने के निर्देश
- 20 मई तक मकान सूचीकरण पूर्ण करने का लक्ष्य
- स्कूल चलो अभियान के तहत सभी ड्रॉपआउट बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश
जनसुनवाई और हेल्पलाइन पर भी समीक्षा
बैठक में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी के तहत लंबित मामलों के समयबद्ध निराकरण की समीक्षा की गई।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- क्या जिले के सभी नाव घाटों पर लाइसेंस और लाइफ जैकेट की अनिवार्य व्यवस्था पहले से प्रभावी थी, या यह निर्देश किसी हादसे की आशंका के बाद सख्त किए जा रहे हैं?
- बाल रोग विशेषज्ञों की कमी लंबे समय से है, तो क्या यह माना जाए कि स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में ग्रामीण स्वास्थ्य अब तक पीछे रहा है?
- ब्लैक स्पॉट और सड़क सुरक्षा पर बार-बार निर्देश के बावजूद क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था कमजोर साबित हो रही है, या फिर सुधार सिर्फ बैठकों तक सीमित है?