राजनांदगांव; महुआ लड्डू से लेकर एनर्जी बार तक… राजनांदगांव के ‘वन धन मॉडल’ ने अरुणाचल टीम को किया प्रभावित Aajtak24 News

महुआ लड्डू से लेकर एनर्जी बार तक… राजनांदगांव के ‘वन धन मॉडल’ ने अरुणाचल टीम को किया प्रभावित Aajtak24 News

राजनांदगांव - जिले के कौरिनभाठा स्थित महुआ प्रसंस्करण केंद्र (वन धन विकास केंद्र) में मंगलवार को उस समय विशेष अंतरराज्यीय पहचान देखने को मिली जब अरुणाचल प्रदेश वन विभाग का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अध्ययन भ्रमण के लिए पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र में चल रही गतिविधियों, महिला समूहों की कार्यप्रणाली और लघु वनोपज आधारित उत्पाद निर्माण प्रक्रिया का विस्तार से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने महुआ से तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की खुले मन से सराहना की।

दल में अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष नालोंग मिजे, विधायक चौ जिंगनु नामचूम, उपाध्यक्ष टीजी बाकि और प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. सुब्रमण्यम सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पूरे केंद्र की संरचना और उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी। महिला समूह की सदस्य श्रीमती भारती, शीतल, मीना और अन्य सदस्यों ने महुआ लड्डू, महुआ एनर्जी बार, शरबत, जूस, कोदो कुकीज और रागी कुकीज जैसे उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया समझाई।

अतिथियों ने न केवल उत्पादों का स्वाद लिया बल्कि उन्हें पौष्टिक और बाजार की दृष्टि से बेहद उपयोगी बताया। समूह की महिलाओं के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र के बाहर स्थित छत्तीसगढ़ हर्बल्स आउटलेट से 4120 रुपये के हर्बल उत्पादों की खरीद भी की, जिससे स्थानीय उत्पादों के प्रति उनकी रुचि और भरोसा झलकता है।

केंद्र प्रबंधक देवेश जंघेल ने बताया कि वन धन विकास योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है और यह मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन रहा है। उन्होंने कहा कि उड़ीसा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बाद अब अरुणाचल प्रदेश का यह दौरा इस सफलता की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है। यह दौरा न केवल छत्तीसगढ़ की लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की ताकत को दर्शाता है, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों की बढ़ती भूमिका और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या वन धन विकास मॉडल को पूरे देश में लागू करने की कोई ठोस नीति है, या यह अभी भी कुछ चुनिंदा केंद्रों तक सीमित सफलता है?
  2. महिला समूहों को प्रोत्साहन राशि तो दी जा रही है, लेकिन क्या उनकी आय और बाजार पहुंच को स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए कोई दीर्घकालिक रणनीति मौजूद है?
  3. जब अन्य राज्यों के प्रतिनिधि लगातार केंद्र का भ्रमण कर रहे हैं, तो क्या स्थानीय स्तर पर इन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग उतनी मजबूत है जितनी अंतरराज्यीय स्तर पर दिखाई जा रही है?

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