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| राजनांदगांव; बुढ़ानछापर में ‘सुशासन तिहार’ का बड़ा शिविर: 866 आवेदन, राशन से लेकर इलाज तक मौके पर समाधान Aajtak24 News |
राजनांदगांव - जिले के डोंगरगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ानछापर में मंगलवार को सुशासन तिहार 2026 के तहत जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 16 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। शिविर में कुल 866 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 858 मांग से संबंधित और 8 शिकायत से संबंधित आवेदन शामिल रहे। प्रशासन द्वारा इन सभी आवेदनों के त्वरित निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिविर के दौरान कई योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों को प्रदान किया गया। 15 लोगों को राशन कार्ड वितरित किए गए, 6 हितग्राहियों को पेंशन एवं राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के स्वीकृति आदेश दिए गए। वहीं 5 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के तहत शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग द्वारा मूंग बीज, मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली जाल और आइस बॉक्स तथा अन्य विभागों द्वारा भी हितग्राही मूलक सामग्री का वितरण किया गया। परिवहन विभाग ने मौके पर लर्निंग लाइसेंस भी जारी किए।
शिविर में स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां सिकल सेल, टीबी, शुगर, ब्लड प्रेशर और खून की जांच सहित कई नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किए गए और जरूरतमंदों को दवाइयां भी वितरित की गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन किया गया। साथ ही पोषण जागरूकता के लिए पोषण कलश और अनाज से बने गणेश की झांकी भी प्रदर्शित की गई।
शिविर में नशा मुक्ति भारत अभियान के तहत ग्रामीणों को शपथ दिलाई गई और बच्चों के सुपोषण के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न विभागों ने योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी, जिससे ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ और समझ मिल सके।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 866 आवेदन एक ही शिविर में आना क्या यह दर्शाता है कि गांव स्तर पर नियमित शिकायत निवारण व्यवस्था कमजोर है?
- क्या इन शिविरों में दिए गए लाभ (राशन कार्ड, ऋण, पेंशन) वास्तव में स्थायी और समयबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा हैं या सिर्फ शिविर आधारित तात्कालिक वितरण?
- इतने बड़े पैमाने पर योजनाओं की घोषणा और वितरण के बावजूद क्या यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वास्तविक पात्र हितग्राही ही लाभ पा रहे हैं?
