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| छिंदवाड़ा को कुपोषण मुक्त बनाने की मुहिम: जिले के 'आयुष्मान आरोग्य मंदिरों' में सजे पोषण क्लिनिक Aajtak24 News |
छिंदवाड़ा - जिले में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के निर्देशन में एक विशेष अभियान चलाया गया। गुरुवार को जिले के समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर “पोषण क्लिनिक” का सफल आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने साझा शक्ति के साथ बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की।
मैदानी अमले ने की कुपोषित बच्चों की पहचान
अभियान के तहत सभी विकासखंडों के आंगनवाड़ी केंद्रों पर सक्रिय मैदानी अमले ने घर-घर और केंद्रों पर जाकर बच्चों का वजन व शारीरिक माप लिया। इस स्क्रीनिंग के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान की गई, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी आरोग्य केंद्रों पर लाया गया। यहाँ मेडिकल ऑफिसर्स, सीएचओ (CHO) और एएनएम द्वारा बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
जटिल मामलों में तत्काल रेफरल की सुविधा
जांच के दौरान जिन बच्चों में चिकित्सीय जटिलताएं (Medical Complications) पाई गईं, उन्हें बिना देरी किए पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) रेफर किया गया। साथ ही, गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को 'राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम' के तहत विशेषज्ञ उपचार हेतु भेजा गया है। निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार, सभी केंद्रों पर बच्चों को आवश्यक दवाइयां और परामर्श भी उपलब्ध कराया गया।
12 सप्ताह का विशेष फॉलो-अप प्लान
प्रशासन ने इस बार कुपोषण के खिलाफ 'सतत निगरानी' की रणनीति अपनाई है। ऐसे बच्चे जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे कुपोषित हैं, उन्हें समुदाय स्तर पर ही ठीक किया जाएगा। इसके लिए अगले 12 सप्ताह (3 महीने) तक दोनों विभागों के कार्यकर्ता बच्चों के घर जाकर उनके स्वास्थ्य और खान-पान का सतत फॉलो-अप लेंगे।
नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान की केवल शुरुआत ही नहीं, बल्कि परिणाम भी दिखने चाहिए। इसके लिए जिला और विकासखंड स्तर के अधिकारियों को मासिक समीक्षा (Monthly Review) करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल से जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी आने और बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में सुधार की उम्मीद है।
