गढ़ मंडी में अन्नदाता से 'गुंडागर्दी'; गेहूं तौलकर लौट रहे किसान को घेरकर पीटा, सोने की चैन और नकदी लूटी Aajtak24 News

गढ़ मंडी में अन्नदाता से 'गुंडागर्दी'; गेहूं तौलकर लौट रहे किसान को घेरकर पीटा, सोने की चैन और नकदी लूटी Aajtak24 News

रीवा - मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार जहां एक ओर किसानों को 'अन्नदाता' मानकर उन्हें हर संभव सुविधा देने का दावा कर रही है, वहीं रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने कानून-व्यवस्था और किसानों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। गढ़ मंडी में गेहूं तौलकर घर वापस जा रहे एक किसान और ट्रैक्टर चालक के साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उनसे सोने की चैन और नकदी लूटने का भी सनसनीखेज आरोप लगा है।

विवाद की वजह: 'बिखरा हुआ गेहूं' बना हमले का कारण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सिरेया निवासी 34 वर्षीय दिवाकर सिंह शनिवार, 24 अप्रैल 2026 की शाम को गढ़ सोसाइटी में अपना गेहूं तौलवाने गए थे। पीड़ित के अनुसार, विवाद की जड़ मंडी के अंदर बिखरा हुआ थोड़ा सा गेहूं बना। इसी बात को लेकर वहां काम करने वाले लेबर (मजदूर) नाराज हो गए। जैसे ही किसान अपना काम निपटाकर ट्रैक्टर से घर के लिए रवाना हुआ, मंडी मोड़ के पास घात लगाकर बैठे लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया।

10 से अधिक हमलावरों ने घेरा, जमकर बरपाया कहर

पीड़ित दिवाकर सिंह ने गढ़ थाना प्रभारी को दिए लिखित आवेदन में बताया कि शाम करीब 7 बजे जब वे मंडी मोड़ के पास पहुंचे, तभी लोरी नंबर-03 निवासी छोटू साकेत (पिता शिवकुमार साकेत) और उसके साथ मौजूद लगभग 10-12 अन्य लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। आरोपियों ने पहले गंदी-गंदी गालियां दीं और फिर अचानक हमला कर दिया। आरोप है कि मारपीट के दौरान हमलावरों ने किसान के गले से सोने की चैन झपट ली और उनकी जेब में रखे करीब 12 हजार रुपये नकद भी लूट लिए। हमले में किसान के गले और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। किसी तरह जान बचाकर निकले पीड़ित ने गढ़ थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई।

समिति प्रबंधन और सुरक्षा पर उठे सवाल

इस पूरी घटना ने गढ़ सोसाइटी की आंतरिक सुरक्षा और समिति प्रबंधन की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। पीड़ित का कहना है कि समिति प्रबंधक अखंड कुमार मिश्रा को इन आरोपियों की पहचान हो सकती है। सवाल यह भी है कि मंडी जैसे सार्वजनिक स्थल पर इतनी बड़ी वारदात हो गई और किसी ने बीच-बचाव क्यों नहीं किया? स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपार्जन केंद्रों पर ही किसान सुरक्षित नहीं हैं, तो वे अपनी उपज लेकर कहाँ जाएँ?

पुलिसिया कार्रवाई और प्रत्यक्षदर्शी

घटना के समय वहां मौजूद रामनरेश गुप्ता को मामले का मुख्य प्रत्यक्षदर्शी बताया जा रहा है। गढ़ पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले को जांच में लिया है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित का चिकित्सीय परीक्षण (MLC) कराया जा रहा है और जल्द ही आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

अन्नदाता का अपमान: ग्रामीणों में भारी आक्रोश

इस घटना के बाद ग्राम सिरेया सहित आसपास के इलाकों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ मुख्यमंत्री किसानों को हर सुविधा देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ रीवा में अन्नदाता को सरेराह लूटा और पीटा जा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि यदि आरोपियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। यह मामला केवल आपसी विवाद का नहीं है, बल्कि यह एक मेहनतकश किसान के आत्मसम्मान और सुरक्षा से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि रीवा पुलिस इन 'लुटेरे' हमलावरों को कब तक सलाखों के पीछे पहुँचाती है और पीड़ित किसान को न्याय दिला पाती है।



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