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| बड़वानी; वन अधिकार दावों पर प्रशासन सख्त! ‘हक नहीं छूटना चाहिए’, कलेक्टर ने अफसरों को दी चेतावनी Aajtak24 News |
बड़वानी - जयति सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागृह में वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर वन अधिकार अधिनियम से जुड़े लंबित दावों की गहन समीक्षा की। बैठक में एमपीएफआरए पोर्टल पर दर्ज मान्य, अमान्य और लंबित दावों की स्थिति पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को पारदर्शिता और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला स्तरीय समिति, उपखंड स्तरीय समिति और ग्राम वन अधिकार समितियों द्वारा पुनः परीक्षण के बाद निराकृत किए गए मामलों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी आवेदक का दावा अमान्य किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण संबंधित व्यक्ति को अनिवार्य रूप से बताया जाए, ताकि प्रक्रिया पर सवाल न उठें और पात्र व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित न रहें।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि डिजिटल रिकॉर्ड के साथ-साथ सभी प्रकरणों का भौतिक रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दस्तावेजों की कमी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण दावे लंबित रहते हैं, जिससे आदिवासी और वनभूमि पर आश्रित लोगों को परेशानी होती है।बैठक में दस्तावेजों की पूर्णता पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक फाइल में विज्ञप्ति, दावा-आपत्ति, ग्राम पंचायत प्रस्ताव, स्थल के फोटोग्राफ और हस्तलिखित प्रारूप-11 अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत किसी भी पात्र व्यक्ति का अधिकार नहीं छूटना चाहिए।
प्रशासन ने सभी समितियों को आपसी समन्वय के साथ लंबित दावों का समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी माना गया कि कई प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं, जिससे ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है। बैठक में जयति सिंह के साथ डीएफओ सेंधवा, डीएफओ बड़वानी, डीएफओ खरगोन, एसडीएम बड़वानी और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, तो जिले में अब तक इतने दावे लंबित क्यों हैं?
- क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले वर्षों में कितने दावे बिना स्पष्ट कारण बताए अमान्य किए गए और उनमें से कितनों पर दोबारा सुनवाई हुई?
- वन अधिकार दावों के निराकरण में देरी के लिए क्या किसी अधिकारी या समिति की जवाबदेही तय की गई है?
