हरदा जनसुनवाई में बैंक, पेंशन और रोजगार योजनाओं पर सख्ती Aajtak24 News

हरदा जनसुनवाई में बैंक, पेंशन और रोजगार योजनाओं पर सख्ती Aajtak24 News

हरदा - जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती अंजली जोसेफ जोनाथन ने नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं। जिला पंचायत सभाकक्ष में हुई इस सुनवाई में विभिन्न विभागों से जुड़े मामले सामने आए, जिनमें बैंकिंग, पेंशन, भूमि और स्वरोजगार से संबंधित शिकायतें प्रमुख रहीं। इस दौरान उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नागरिकों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही निराकरण के निर्देश दिए।

लोन चुकाने के बाद भी जमीन “बंधक” से मुक्ति नहीं

ग्राम अहलवाड़ा निवासी फुलवती बाई ने शिकायत की कि उन्होंने बैंक लोन पूरी तरह चुका दिया है, इसके बावजूद उनकी जमीन का खसरा अभी भी बंधन मुक्त नहीं किया गया है।

इस पर कलेक्टर ने अग्रणी बैंक प्रबंधक को निर्देश दिए कि:

  • आवेदिका की जमीन को तुरंत बंधन मुक्त किया जाए
  • प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न हो
  • रिकॉर्ड अपडेट तुरंत सुनिश्चित किया जाए

रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं पर फोकस

ग्राम बाजनिया निवासी महेंद्र यादव ने व्यवसाय शुरू करने के लिए शासकीय योजना के तहत ऋण दिलाने की मांग की।

इस पर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को निर्देश दिए गए कि:

  • आवेदक की पात्रता का तुरंत परीक्षण किया जाए
  • पात्र पाए जाने पर ऋण प्रक्रिया शुरू की जाए
  • स्वरोजगार योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाए

वृद्धावस्था पेंशन पर भी निर्देश

खेड़ीपुरा निवासी शांतिबाई ने वृद्धावस्था पेंशन शुरू कराने की मांग की। इस पर सामाजिक न्याय विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

प्रशासन का संदेश: “आवेदन नहीं, समाधान चाहिए”

जनसुनवाई में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हर आवेदन का समयबद्ध निराकरण किया जाए ताकि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब लोन चुकाने के बाद भी जमीन बंधक मुक्त नहीं हो रही, तो क्या बैंक और राजस्व सिस्टम के बीच समन्वय की गंभीर कमी नहीं दिखती?
  2. वृद्धावस्था पेंशन जैसे मामलों में भी जनसुनवाई की जरूरत क्यों पड़ती है—क्या नियमित सिस्टम इन बुनियादी सेवाओं को समय पर नहीं दे पा रहा?
  3. क्या स्वरोजगार योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, या फिर पात्रता जांच और प्रक्रिया की देरी ही मुख्य बाधा बनी हुई है?

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