नर्मदापुरम में संभागायुक्त का औचक निरीक्षण: कार्यालय शाखाओं की बारीकी से जांच Aajtak24 News

नर्मदापुरम में संभागायुक्त का औचक निरीक्षण: कार्यालय शाखाओं की बारीकी से जांच Aajtak24 News

नर्मदापुरम - नर्मदापुरम संभाग में नवपदस्थ संभागायुक्त श्री श्रीकांत बनोठ ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए कमिश्नर कार्यालय परिसर का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शाखाओं और कार्यालयों की कार्यप्रणाली, दस्तावेजी व्यवस्था और कर्मचारियों के दायित्वों की विस्तृत समीक्षा की।

सभी शाखाओं का निरीक्षण, कर्मचारियों से सीधी पूछताछ

संभागायुक्त ने सामान्य शाखा और स्थापना शाखा का निरीक्षण करते हुए वहां कार्यरत कर्मचारियों से उनके कार्य और जिम्मेदारियों की जानकारी ली। उन्होंने फाइलों के निस्तारण, कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय को लेकर भी विस्तार से चर्चा की।

महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के संभागीय कार्यालय की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया।

बजट और वित्तीय व्यवस्था पर विशेष फोकस

वित्त एवं नाजिर शाखा में पहुंचकर संभागायुक्त ने बजट संबंधी जानकारी ली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मीटिंग हॉल और कार्यालय कक्षों का भी निरीक्षण

संभागायुक्त ने कार्यालय परिसर के मीटिंग हॉल और अन्य कक्षों का भी बारीकी से निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

प्रशासनिक संदेश: “फील्ड से लेकर फाइल तक सख्त निगरानी”

निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि संभागीय स्तर पर अब हर शाखा की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. पदभार ग्रहण के तुरंत बाद निरीक्षण करना एक प्रतीकात्मक कदम है या फिर वास्तव में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक खामियों को उजागर करने की शुरुआत?
  2. क्या वित्त और स्थापना शाखाओं में मिली व्यवस्थागत खामियां पहले से मौजूद थीं, और क्या इनके लिए पूर्ववर्ती निरीक्षण तंत्र जिम्मेदार नहीं है?
  3. महिला एवं बाल विकास जैसी योजनाओं की समीक्षा के बावजूद क्या जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव संतोषजनक है, या फिर सिर्फ फाइलों तक ही प्रगति सीमित है?

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