डिंडौरी; विद्योदय गौशाला बनेगी पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल Aajtak24 News

डिंडौरी; विद्योदय गौशाला बनेगी पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल Aajtak24 News

डिंडौरी - ग्राम पंचायत हीनौता स्थित जैन समाज द्वारा संचालित विद्योदय गौशाला एवं नव-निर्मित उद्यान का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इसे जिले का आदर्श पर्यावरणीय मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताई। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गौवंश की देखभाल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह गौशाला केवल गौसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गौशाला परिसर में वर्षा जल संचयन प्रणाली को और मजबूत किया जाए। इसके लिए पुनर्भरण कुंड और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कर भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके। उन्होंने परिसर में नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, आंवला और करंज जैसे औषधीय एवं पर्यावरण हितैषी पौधों के रोपण पर जोर दिया। साथ ही गौशाला को जैविक खेती और पर्यावरण अनुकूल मॉडल के रूप में विकसित करने की बात कही।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गोबर आधारित जैविक खाद निर्माण और गौमूत्र से बने उत्पादों के विकास को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे गौशाला को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। नव-निर्मित उद्यान का भ्रमण करते हुए उन्होंने औषधीय पौधों की वाटिका, पक्षियों के लिए जलपात्र और सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास इस स्थान को न केवल पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बनाएंगे, बल्कि आमजन के लिए प्रेरणा भी बनेंगे।

इस अवसर पर गौशाला संचालक संजय जैन, सम्यक जैन, रितेश जैन सहित अन्य पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने गौशाला की गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की। कलेक्टर ने अंत में जैन समाज द्वारा गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह गौशाला आने वाले समय में जिले के लिए एक प्रेरणादायी और आदर्श केंद्र के रूप में स्थापित होगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या गौशालाओं को आदर्श मॉडल बनाने की यह योजना सिर्फ निरीक्षण तक सीमित है, या इसके लिए सरकार कोई बजट और समयबद्ध कार्ययोजना भी दे रही है?
  2. भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन जिले में वास्तविक जल संकट वाले क्षेत्रों में अब तक कितने ठोस काम हुए हैं?
  3. गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री की क्या कोई स्थायी सरकारी व्यवस्था बनाई जा रही है?

Post a Comment

Previous Post Next Post