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| बैतूल कलेक्टर का अल्टीमेटम — मातृत्व मृत्यु हुई तो तय होगी जिम्मेदारी Aajtak24 News |
बैतूल - जिले में कुपोषण और मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे ने महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में साफ चेतावनी दी कि कुपोषण और मातृत्व मृत्यु के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व मृत्यु पर “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले के सभी कुपोषित बच्चों का शत-प्रतिशत सर्वे किया जाए और उनकी अद्यतन जानकारी निर्धारित एप पर दर्ज हो, ताकि लगातार मॉनिटरिंग की जा सके। उन्होंने सीडीपीओ अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फील्ड भ्रमण के दौरान कुपोषण के वास्तविक कारणों की पहचान करें, जिससे समस्या के अनुरूप कार्ययोजना बनाई जा सके।
कलेक्टर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशाओं को बच्चों का सही वजन मापने और फील्ड स्तर पर दक्षता बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्रों में शत-प्रतिशत बेड ऑक्युपेंसी, कुपोषित बच्चों का 12 सप्ताह तक नियमित फॉलोअप और आंगनवाड़ियों में थर्ड मील अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान डॉ. आशीष ठाकुर ने बताया कि बच्चों के अत्यधिक कम वजन के पीछे मातृत्व स्वास्थ्य की अनदेखी एक बड़ा कारण है। उन्होंने गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई।
सीमेम कार्यक्रम की समीक्षा में प्रगति असंतोषजनक मिलने पर प्रभातपट्टन सीडीपीओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं समुदाय आधारित गतिविधियों और पोषण कार्यक्रमों में खराब प्रदर्शन पर शाहपुर, भैंसदेही और घोड़ाडोंगरी के सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा सुधार नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रस्तावित 66 आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने भूमि आवंटन जल्द पूरा कर निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए। साथ ही बाल सुलभ शौचालयों की स्वीकृति दो दिन में जारी करने और लाड़ली लक्ष्मी योजना में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति सुनिश्चित करने को कहा।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में एएनसी पंजीयन की कम प्रगति पर भीमपुर, चिचोली और बैतूल के बीएमओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की जांच, फॉलोअप और सुरक्षित डिलीवरी की ट्रैकिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी एनीमिक गर्भवती महिला चिन्हांकन से नहीं छूटनी चाहिए। टीकाकरण और होम बेस्ड न्यू बॉर्न केयर में लापरवाही पर भी सख्त नाराजगी जताते हुए सभी बीएमओ को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।
बैठक में एसएनसीयू टीम द्वारा प्री-मैच्योर और अतिकम वजन वाले बच्चों के सफल उपचार की सराहना भी की गई। कलेक्टर ने कहा कि संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से किए गए कार्य ही गरीब और जरूरतमंद लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करते हैं। बैठक में सहायक कलेक्टर पुष्पराज खोट, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनोज हुरमाड़े, सिविल सर्जन जगदीश घोरे और जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब वर्षों से कुपोषण और मातृत्व मृत्यु के मामले सामने आते रहे हैं, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कितनी ठोस कार्रवाई हुई है?
- क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि जिले के किन ब्लॉकों में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे और मातृत्व मृत्यु के मामले हैं?
- आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि बच्चे अतिकम वजन और महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं, तो क्या यह योजनाओं की विफलता नहीं मानी जाएगी?
