रीवा; महाघोटाला: रीवा-मऊगंज में बिल्डर लाइसेंस की आड़ में अरबों की 'खनिज डकैती' Aajtak24 News

रीवा; महाघोटाला: रीवा-मऊगंज में बिल्डर लाइसेंस की आड़ में अरबों की 'खनिज डकैती' Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज:- विंध्य क्षेत्र के रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा कारनामा सामने आया है जिसे सुनकर प्रशासनिक गलियारे भी सन्न हैं। आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय खनिज माफियाओं ने राजस्व को चूना लगाने के लिए बिल्डर लाइसेंस और मेडिकल स्टोर के जीएसटी फर्मों का सहारा लिया है। अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी द्वारा उजागर किए गए इस मामले ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मेडिकल स्टोर की आड़ में खनिजों का 'इलाज': नियमों की उड़ी धज्जियां

इस पूरे घोटाले का सबसे हैरान करने वाला पहलू 'मेडिकल स्टोर कनेक्शन' है। नियमानुसार, मेडिकल स्टोर के लाइसेंस पर दवाओं के अलावा किसी अन्य वस्तु का व्यवसाय प्रतिबंधित है। लेकिन मऊगंज और रीवा में फार्मा फर्मों के नाम पर गिट्टी, मिट्टी और मुरूम के बिल काटे जा रहे हैं। कुछ संचालकों ने तो कैमरे के सामने यह तक स्वीकार कर लिया है कि वे अपनी मेडिकल फर्म के नाम पर खनिज बेच रहे हैं। यह न केवल व्यापारिक धोखाधड़ी है, बल्कि शासन के नियमों का खुला उल्लंघन भी है।

अगस्त क्रांति मंच का बड़ा आरोप: "हजारों करोड़ की संगठित लूट"

अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी ने तथ्यों के साथ प्रशासन को घेरा है। उनके प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:

  • फर्जी बिलों का खेल: बाजार में 20% से अधिक फर्जी और काल्पनिक बिल चलाए जा रहे हैं, ताकि अवैध उत्खनन को वैध दिखाया जा सके।

  • बिल्डर लाइसेंस का दुरुपयोग: माफिया बिल्डर का लाइसेंस लेकर और मामूली जीएसटी चुकाकर अरबों रुपये की मिट्टी और मुरूम खोदकर बेच चुके हैं।

  • प्रशासनिक मौन: खनिज विभाग और जिला प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी यह संकेत देती है कि इस संगठित लूट को कहीं न कहीं 'ऊपर' से संरक्षण प्राप्त है।

जांच के वो बिंदु, जो खोल सकते हैं भ्रष्टाचार की परतें

कुंज बिहारी तिवारी ने प्रशासन को चुनौती देते हुए कुछ ऐसे तकनीकी बिंदु उठाए हैं, जिनका जवाब मिलते ही घोटाले की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी:

  1. स्रोत का मिलान: खनिज किस खदान, किस खसरा नंबर और किस पटवारी हल्का से निकाला गया?

  2. इनपुट-आउटपुट ऑडिट: संबंधित फर्मों ने कितनी मात्रा में सामग्री खरीदी (Inward) और कितनी बेची (Outward)? यदि खदान का कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो सामग्री आई कहाँ से?

  3. परिवहन रिकॉर्ड: बिना खनिज विभाग की 'रॉयल्टी रसीद' के हजारों ट्रक सामग्री बाज़ारों में कैसे पहुँच गई?

विंध्य का अब तक का सबसे बड़ा खनिज घोटाला!

जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय या विशेष जांच दल (SIT) से सूक्ष्मता से जांच कराई जाए, तो यह रीवा और मऊगंज के इतिहास का सबसे बड़ा खनिज घोटाला साबित हो सकता है। यह केवल टैक्स चोरी नहीं, बल्कि विंध्य की धरा के सीने को चीरकर निकाले गए प्राकृतिक संसाधनों की "डकैती" है।

"यह सिर्फ कर चोरी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की खुली डकैती है। बिल्डर और मेडिकल स्टोर के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। हम चुप नहीं बैठेंगे।"

कुंज बिहारी तिवारी, संयोजक, अगस्त क्रांति मंच

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