
रीवा में भू-माफियाओं का तांडव: सरकारी जमीनों और 'रखरौनी' पर अवैध कब्जा Aajtak24 News
रीवा - विंध्य की हृदयस्थली रीवा में इन दिनों भू-माफियाओं और रसूखदार प्रॉपर्टी डीलरों का जाल तेजी से फैल रहा है। शहर से सटे ग्रामीण इलाकों, विशेषकर जोरी और साबा नाला जैसे क्षेत्रों में स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। आरोप है कि भू-माफिया अब न केवल किसानों की निजी जमीनों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि नहर विभाग और गौवंशों के चरने के लिए आरक्षित शासकीय भूमि (रखरौनी) को भी खुर्द-बुर्द करने में जुटे हैं।
गौचर और नहर की जमीनों पर सज गई दुकानें
ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर वर्षों से गांव के मवेशी बैठते और चरते थे, आज वहां भू-माफियाओं ने प्लॉटिंग कर दी है। गौवंशों के बैठने के लिए आरक्षित शासकीय 'रखरौनी' और नहर विभाग की जमीनों पर धड़ल्ले से सड़क, दुकानें और मकान बनाए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी जमीनों को निजी बताकर खुलेआम खरीद-फरोख्त की जा रही है, और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
बाणसागर विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
इस पूरे खेल में बाणसागर (नहर विभाग) के अधिकारियों की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है। ग्रामीणों ने सीधा आरोप लगाया है कि नहर के किनारे की बेशकीमती जमीनों पर अवैध निर्माण हो रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। आरोप यह भी है कि कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कागजों में हेरफेर कर शासकीय जमीनों का बंदरबांट किया जा रहा है।
किसानों की पैतृक जमीन पर खतरा, रोज हो रहे विवाद
भू-माफियाओं की इस सक्रियता ने स्थानीय किसानों की नींद उड़ा दी है। खेतों की सीमाएं बदलने, किसानों के पुश्तैनी रास्ते बंद करने और दबाव बनाकर कब्जा करने जैसी शिकायतें हर दिन सामने आ रही हैं। जोरी और साबा नाला क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि उनकी पैतृक जमीनों की सुरक्षा नहीं की गई, तो उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचेगा।
प्रशासन को चेतावनी: कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आगाह किया है कि भू-माफियाओं के इस आतंक के कारण गांवों में प्रतिदिन विवाद की स्थिति बन रही है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह आक्रोश कभी भी बड़ी हिंसा या कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती का रूप ले सकता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
बाणसागर और अन्य शासकीय जमीनों का तत्काल सीमांकन कराया जाए।
अवैध कब्जों और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर जमीनों को मुक्त कराया जाए।
शासकीय जमीनों को निजी बताकर बेचने वाले प्रॉपर्टी डीलरों और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज हो।