उमरिया; मिट्टी माफियाओं पर चला प्रशासन का बुलडोजर: जेसीबी, मेटाडोर और ट्रैक्टर जब्त Aajtak24 News

उमरिया; मिट्टी माफियाओं पर चला प्रशासन का बुलडोजर: जेसीबी, मेटाडोर और ट्रैक्टर जब्त Aajtak24 News

उमरिया - जिले में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त अभियान शुरू कर दिया है। कलेक्टर राखी सहाय के निर्देशन में खनिज विभाग की टीम लगातार छापेमार कार्रवाई कर रही है। हालिया कार्रवाई में मिट्टी और मुरूम के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में लगे ट्रैक्टर, जेसीबी और मेटाडोर जब्त किए गए हैं। प्रभारी अधिकारी डॉ. विद्याकांत तिवारी, सहायक खनि अधिकारी दिवाकर चतुर्वेदी, खनि निरीक्षक प्रभात कुमार पट्टा और प्रभारी खनि निरीक्षक एन.एस. आर्मो की संयुक्त टीम द्वारा जिले में लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी दौरान तहसील बांधवगढ़ के सिंगलटोला रेलवे फाटक के पास उमरिया-शहपुरा मार्ग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को खनिज मिट्टी परिवहन करते पकड़ा गया।

जांच में वाहन चालक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिसके बाद वाहन क्रमांक एमपी 54 जेड 2014 को जब्त कर कार्रवाई शुरू की गई। वाहन स्वामी की पहचान मुन्ना यादव पिता रूरू यादव के रूप में हुई है। इसके अलावा तहसील पाली क्षेत्र के बेली-मुदरिया रोड पर निजी भूमि से अवैध रूप से मिट्टी और मुरूम उत्खनन करते हुए एक जेसीबी और दो मेटाडोर भी पकड़े गए। प्रशासन के अनुसार यह सामग्री निर्माणाधीन मुदरिया प्लेटफॉर्म की भराई के लिए ले जाई जा रही थी। मौके से जेसीबी क्रमांक एमपी 18 डीए 0473 तथा मेटाडोर क्रमांक एमपी 18 जीए 5255 और एमपी 18 जीए 4978 को जब्त कर थाना पाली परिसर में खड़ा कराया गया।

खनिज विभाग ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश खनिज अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण नियम 2022 के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध खनन के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. प्रशासन लगातार कार्रवाई का दावा कर रहा है, फिर भी जिले में खुलेआम अवैध खनन कैसे जारी है? क्या स्थानीय स्तर पर किसी संरक्षण का मामला है?
  2. जिन वाहनों को जब्त किया गया, क्या उनके पीछे काम कर रहे बड़े खनन नेटवर्क और फाइनेंसरों तक भी कार्रवाई पहुंचेगी या सिर्फ ड्राइवर और छोटे ऑपरेटर ही निशाने पर रहेंगे?
  3. अवैध खनन से पर्यावरण और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान का क्या आकलन किया गया है, और अब तक कितनी वसूली या दंडात्मक कार्रवाई वास्तव में हुई है?

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