![]() |
| भिण्ड; 45 दिन की ‘फौजी फैक्ट्री’: भिण्ड के युवाओं को वर्दी तक पहुंचाने की तैयारी शुरू Aajtak24 News |
भिण्ड - भिण्ड में अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने के उद्देश्य से “शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026” का जिला स्तरीय शुभारंभ किया गया। शासकीय आईटीआई परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों ने युवाओं को अनुशासन, मेहनत और फोकस के साथ प्रशिक्षण पूरा करने की सलाह दी।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कलेक्टर कलेक्टर भिण्ड ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की मजबूत बुनियाद है। उन्होंने युवाओं से कहा कि हॉस्टल के अनुशासित माहौल में एक-दूसरे से सीखते हुए पूरे समर्पण के साथ प्रशिक्षण लें और किसी भी समस्या की स्थिति में प्रशासन को अवगत कराएं।
पुलिस अधीक्षक पुलिस अधीक्षक भिण्ड ने कहा कि 45 दिन का यह आवासीय प्रशिक्षण युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी विषयों को विस्तार से पढ़ाना संभव नहीं होगा, लेकिन सामूहिक अध्ययन और चर्चा से प्रतिभागी अपनी तैयारी को मजबूत बना सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अनुशासन में रहकर फिजिकल ट्रेनिंग और पढ़ाई दोनों पर पूरा ध्यान देने की सलाह दी।
अपर कलेक्टर ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों को इस योजना के लिए चुना गया है और भिण्ड का चयन होना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निःशुल्क आवासीय सुविधा, शारीरिक प्रशिक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरित की गई। इसके बाद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने हॉस्टल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सरकार युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दे रही है, लेकिन पिछले वर्षों में इस योजना से कितने युवाओं को वास्तव में नौकरी मिली, इसका डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
- 45 दिन के प्रशिक्षण को “बुनियाद” बताया जा रहा है, लेकिन क्या इतने कम समय में प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं और फिजिकल टेस्ट की गंभीर तैयारी संभव है?
- प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ने के बीच क्या यह योजना स्थायी रोजगार का समाधान है या फिर युवाओं को सिर्फ प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र तक सीमित रखा जाएगा?
