जबलपुर; गेहूं खरीदी केंद्र में मिली बड़ी लापरवाही! बोरियों पर किसानों के नाम तक नहीं, कलेक्टर भड़के Aajtak24 News

जबलपुर; गेहूं खरीदी केंद्र में मिली बड़ी लापरवाही! बोरियों पर किसानों के नाम तक नहीं, कलेक्टर भड़के Aajtak24 News

जबलपुर - राघवेंद्र सिंह ने कुंडम ब्लॉक के बघराजी स्थित अरिहंत वेयरहाउस में संचालित गेहूं उपार्जन केंद्र का मंगलवार को अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अभिषेक गहलोत और प्रगति गणवीर भी मौजूद रहीं। कलेक्टर ने केंद्र पर बाहर रखे गेहूं और वेयरहाउस में भंडारित गेहूं की मात्रा की जानकारी ली तथा मौके पर ही बोरियों की तौल कराई।

वेयरहाउस के अंदर स्टैक में रखी गेहूं की बोरियों की जांच के दौरान यह पाया गया कि कई बोरियों पर किसानों के नाम या कोड अंकित नहीं थे। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक बोरी पर किसान का नाम अथवा कोड अनिवार्य रूप से लिखा जाए ताकि पूरी खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। कलेक्टर ने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुसार गेहूं उपार्जन कार्य पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। उन्होंने नोडल अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मौसम को देखते हुए कलेक्टर ने उपार्जित गेहूं के सुरक्षित भंडारण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश या नमी से गेहूं खराब न हो, इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएं। निरीक्षण के दौरान भंडारण और रिकॉर्ड संधारण व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। हालांकि निरीक्षण में सामने आई खामियों ने खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बोरियों पर किसानों की पहचान तक दर्ज नहीं है, तो भविष्य में भुगतान, रिकॉर्ड और स्टॉक सत्यापन में गड़बड़ी की आशंका बढ़ सकती है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब शासन के स्पष्ट निर्देश हैं, तो फिर गेहूं की बोरियों पर किसानों के नाम और कोड दर्ज क्यों नहीं पाए गए? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
  2. क्या प्रशासन यह बताएगा कि जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों पर भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच कराई जाएगी या नहीं?
  3. यदि खरीदी केंद्रों पर पारदर्शिता और रिकॉर्ड व्यवस्था में कमी पाई जाती है, तो किसानों के भुगतान और स्टॉक सत्यापन में गड़बड़ी रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था है?

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