खरगोन में पेयजल व्यवस्था पर मंथन, ग्रामीण इलाकों पर प्रशासन का फोकस Aajtak24 News

खरगोन में पेयजल व्यवस्था पर मंथन, ग्रामीण इलाकों पर प्रशासन का फोकस Aajtak24 News

खरगोन - खरगोन में बढ़ती गर्मी और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को कलेक्टर भव्या मित्तल की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण नल जल योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कलेक्टर भव्या मित्तल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण नल जल योजनाओं में जल कर वसूली की प्रगति तेज की जाए ताकि योजनाओं का संचालन व्यवस्थित रूप से जारी रह सके। उन्होंने कहा कि पेयजल व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जनपद पंचायतों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल से संबंधित शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए ताकि गर्मी के दौरान ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बैठक में आगामी ग्रीष्मकाल को देखते हुए संभावित जल संकट से निपटने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्थिति, नल जल योजनाओं की कार्यप्रणाली और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक तैयारियों पर जोर दिया गया।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ मिलिंद कुमार नागदेवे, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री, जिले के सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक यंत्री, उपयंत्री तथा जिला एवं विकासखंड समन्वयक उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल गर्मियों में पेयजल संकट की आशंका के बाद समीक्षा बैठकें होती हैं, लेकिन कई गांवों में आज भी टैंकरों के सहारे पानी पहुंचाना पड़ता है। आखिर स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया?
  2. जल कर वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन जिन गांवों में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी की आपूर्ति नहीं हो रही, वहां ग्रामीणों से कर वसूली को प्रशासन किस आधार पर उचित ठहराता है?
  3. जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई नल जल योजनाएं बंद या अधूरी बताई जाती हैं। जिले में ऐसी कितनी योजनाएं हैं जो पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहीं, और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

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