इन्दौर; भीषण गर्मी में बड़ा खतरा! इंदौर में पटाखा फैक्ट्रियों पर चला प्रशासन का डंडा Aajtak24 News

इन्दौर; भीषण गर्मी में बड़ा खतरा! इंदौर में पटाखा फैक्ट्रियों पर चला प्रशासन का डंडा Aajtak24 News

इन्दौर - इन्दौर में देवास जिले की पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना और लगातार बढ़ती भीषण गर्मी के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी शिवम वर्मा के निर्देश पर जिलेभर में संचालित पटाखा फैक्ट्रियों और गोदामों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा मानकों की जांच के दौरान गंभीर कमियां पाए जाने पर तीन पटाखा फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया। जिला प्रशासन का कहना है कि आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी रोशन राय ने बताया कि तहसील हातोद के ग्राम खजुरिया स्थित एक पटाखा फैक्ट्री का निरीक्षण तहसीलदार द्वारा किया गया। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर फैक्ट्री को सील कर दिया गया। इस फैक्ट्री का संचालन विनोद पिता रूपाजी द्वारा किया जा रहा था। इसी तरह एसडीएम सांवेर द्वारा धतुरिया और पंचडेरिया क्षेत्र में स्थित पटाखा संस्थानों की आकस्मिक जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित संचालकों को आवश्यक सुधार करने और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए।

वहीं बिचोली अनुविभाग क्षेत्र में भी पटाखा फैक्ट्री और गोदामों की जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम राजधरा स्थित शाना फायर वर्क्स और बाबा फायर वर्क्स में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर दोनों इकाइयों को सील कर दिया गया। शाना फायर वर्क्स का संचालन अकरम मंसूरी और बाबा फायर वर्क्स का संचालन सलीम मंसूरी द्वारा किया जा रहा था। यह कार्रवाई तहसीलदार अनिल पटेल, शिखा सोनी, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की उपस्थिति में की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में पटाखा गोदामों, फैक्ट्रियों और अन्य संवेदनशील इकाइयों की जांच लगातार जारी रहेगी। विशेष रूप से ऐसी फैक्ट्रियां जो आग या रासायनिक पदार्थों से संबंधित हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. देवास हादसे के बाद प्रशासन अचानक अलर्ट हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि जिन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की कमी मिली, क्या उनकी पहले कभी नियमित जांच हुई थी या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा था?
  2. तीन फैक्ट्रियां सील कर दी गईं, लेकिन क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिन्होंने इन इकाइयों को सुरक्षा खामियों के बावजूद संचालन की अनुमति दी हुई थी?
  3. इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित पटाखा गोदामों व रासायनिक इकाइयों की वास्तविक संख्या क्या है, और क्या प्रशासन के पास इतनी क्षमता है कि सभी संवेदनशील इकाइयों की नियमित एवं निष्पक्ष मॉनिटरिंग की जा सके?

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