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| श्योपुर; अब मशीन के सहारे उठेंगी बीमार गायें: श्योपुर की गोशाला में तकनीक से बदलेगी गोसेवा की तस्वीर Aajtak24 News |
श्योपुर - जिले की गौशालाओं में अब पारंपरिक व्यवस्था की जगह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। मानपुर गोशाला में बीमार और खड़े नहीं हो पाने वाले गोवंश के उपचार के लिए “काउ लिफ्टिंग मशीन” लाई गई है। प्रशासन का दावा है कि इससे बीमार गायों को आसानी से उठाकर समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। मध्यप्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप कलेक्टर शीला दाहिमा के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ सौम्या आनंद के निर्देशन में जिले की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मानपुर गोशाला में यह मशीन हरियाणा से मंगाई गई है, जिसे महिला स्व-सहायता समूहों ने लगभग 75 हजार रुपये की लागत से खरीदा है।
मानपुर गोशाला से जुड़े कोमल खंडेलवाल ने बताया कि कई बार बीमार गोवंश खड़ा नहीं हो पाता था, जिससे उपचार में परेशानी आती थी। अब काउ लिफ्टिंग मशीन की मदद से ऐसे पशुओं को सुरक्षित तरीके से उठाकर इलाज किया जा सकेगा। प्रशासन इसे गौशाला प्रबंधन में तकनीकी सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। सिर्फ मानपुर ही नहीं, जिले की अन्य गौशालाओं में भी नवाचार किए जा रहे हैं। ग्राम टर्राकला की गोशाला में गायों को चारा पहुंचाने और गोबर उठाने के लिए घोड़ा गाड़ी बनाई गई है, जबकि झिरन्या में समूह द्वारा चक्की स्थापित कर पशुओं के लिए दाना तैयार किया जा रहा है। झिरन्या, नागदा, टर्राकला, श्यामपुर, मानपुर और बरगवां सहित कई गौशालाओं में हरे चारे की नियमित व्यवस्था भी की गई है।
सीईओ जिला पंचायत सौम्या आनंद ने बताया कि जिले की 24 गौशालाओं का संचालन महिला स्व-सहायता समूह कर रहे हैं। गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, बायोगैस और हरा चारा उत्पादन की कार्ययोजना तैयार की गई है। उद्देश्य यह है कि गौशालाएं केवल आश्रय स्थल न बनें, बल्कि आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित हों।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब बीमार गोवंश के लिए अब “काउ लिफ्टिंग मशीन” की जरूरत पड़ रही है, तो क्या यह माना जाए कि अब तक गौशालाओं में उपचार और पशु प्रबंधन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी?
- जिले की 24 गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इन गौशालाओं की आय-व्यय और गोवंश मृत्यु दर का सार्वजनिक ऑडिट कब जारी किया जाएगा?
- कई गौशालाओं में हरे चारे और संसाधनों की कमी की शिकायतें आती रही हैं, ऐसे में क्या प्रशासन हर गौशाला के लिए न्यूनतम सुविधा और पशु स्वास्थ्य मानक तय करेगा?
