नर्मदापुरम; जनसुनवाई में फरियाद, उसी दिन इंसाफ: कलेक्टर के आदेश पर अफसर दौड़े गांव-गांव Aajtak24 News

नर्मदापुरम; जनसुनवाई में फरियाद, उसी दिन इंसाफ: कलेक्टर के आदेश पर अफसर दौड़े गांव-गांव Aajtak24 News

नर्मदापुरम - नर्मदापुरम में कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों का एक ही दिन में निराकरण कर प्रशासन ने सुशासन का संदेश देने की कोशिश की। जिला प्रशासन द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जनसुनवाई में आने वाले प्रत्येक आवेदन पर गंभीरता से कार्रवाई हो और पीड़ितों को जल्द राहत मिले।

इसी कड़ी में 12 मई को आयोजित जनसुनवाई में आए कई मामलों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आवेदकों की समस्याओं का समाधान किया गया। कलेक्टर के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विजय राय ने व्यक्तिगत रूप से प्रकरणों की सुनवाई कर संबंधित अधिकारियों को मौके पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

ग्राम सीरूपुरा निवासी नर्मदीबाई ने वर्ष 1990-95 के खसरा पंचसाला और वर्तमान नक्शे की सत्यप्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया था। प्रशासन ने मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के उन्हें निःशुल्क राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराए। वहीं ग्राम निरखी निवासी गणेश प्रसाद रघुवंशी द्वारा रास्ता खुलवाने की मांग पर हल्का पटवारी को तत्काल मौके पर भेजकर रास्ता खुलवाने की कार्रवाई कराई गई।

इसी प्रकार सोनखेड़ी निवासी सुमनबाई ने पुराने राजस्व प्रकरण की नकल और जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। जिला अभिलेखागार से रिकॉर्ड मंगवाकर जांच कराई गई, जिसमें पता चला कि संबंधित भूमि प्रकरण का निराकरण पहले ही हो चुका है। प्रशासन ने आवेदिका को पूरी जानकारी देकर मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट की।

जिला प्रशासन का कहना है कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आमजन को त्वरित राहत देने का प्रभावी माध्यम बन रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और हर शिकायत का समयबद्ध समाधान हो।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जनसुनवाई के कुछ मामलों का एक दिन में समाधान हो गया, लेकिन जिले में लंबे समय से लंबित हजारों राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए क्या अलग रणनीति बनाई गई है?
  2. प्रशासन त्वरित समाधान का दावा कर रहा है, तो क्या अब हर जनसुनवाई आवेदन के लिए तय समयसीमा सार्वजनिक की जाएगी और देरी करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी?
  3. जिन ग्रामीणों को वर्षों तक राजस्व नकल, सीमांकन और रास्ता विवादों के लिए भटकना पड़ा, क्या प्रशासन यह माने कि पहले सिस्टम में लापरवाही थी? अगर हां, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?

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